NEXT 7 अप्रैल, 2026 श्रीडूंगरगढ़। फर्जी दस्तावेज बनाकर जमीन बेचने के मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायालय ने सख्त रुख अपनाते हुए दो आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने माना कि मामला गंभीर प्रकृति का है, जिसमें मृत व्यक्तियों को जिंदा दिखाकर खातेदारी भूमि का फर्जी विक्रय किया गया।
अपर लोक अभियोजक सोहन नाथ सिद्ध ने बताया कि बरसिंहसर निवासी भँवरलाल पुत्र रतनाराम और मांगीलाल पुत्र भँवरलाल की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई। अभियोजन पक्ष ने आरोपों को गंभीर बताते हुए जमानत का विरोध किया, जिसके बाद एडीजे कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।
2 दिसंबर को दर्ज हुआ था मामला
परिवादी जितेंद्र कुमार पुत्र चंपालाल निवासी श्रीडूंगरगढ़ ने 2 दिसंबर 2025 को लिछमण सिंह कोलासर, चंद्र प्रकाश, हीरालाल सहित अन्य के खिलाफ परिवाद पेश किया। इसमें बताया कि उसके दादा रिद्धकरण बोथरा के नाम गांव लखासर में खसरा नंबर 140 की 66.02 बीघा जमीन थी।
दादा की मृत्यु के बाद जमीन उनके पुत्र- पुत्रियों के नाम दर्ज हुई, लेकिन समय के साथ उनका भी निधन हो गया।
17 नवंबर को हुआ खुलासा
परिवादी को 17 नवंबर 2025 को पता चला कि आरोपियों ने कूटरचित दस्तावेज तैयार कर जमीन का विक्रय कर दिया। आरोप है कि श्रीकोलायत निवासी चंद्र प्रकाश और बीकानेर निवासी हीरालाल ने फर्जी गवाह बनकर इस सौदे को अंजाम दिलाया।
कोर्ट ने माना- सुनियोजित धोखाधड़ी
अपर लोक अभियोजक सोहन नाथ सिद्ध ने दलील दी कि आरोपियों ने कूटरचित दस्तावेजों के जरिए मृत व्यक्तियों को जीवित दर्शाकर फर्जी विक्रय पत्र तैयार कराया, जो सुनियोजित धोखाधड़ी है।
दोनों पक्षों की सुनवाई और केस डायरी के अवलोकन के बाद एडीजे सरिता नौशाद ने भँवरलाल और मांगीलाल की जमानत याचिका खारिज करने का आदेश दिया।
गौरतलब है कि परिवादी जितेंद्र बोथरा की तरफ से एडवोकेट दीपिका करनाणी ने न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत किया था और न्यायालय के आदेश पर थाने में मुकदमा दर्ज हुआ।



















