हिन्दी दिवस पर श्रीडूंगरगढ़ में हुआ भव्य समारोह, साहित्यकारों का सम्मान
NEXT 14 सितम्बर,2025 श्रीडूंगरगढ़। राष्ट्रभाषा हिन्दी प्रचार समिति की ओर से हिन्दी दिवस पर रविवार को भव्य समारोह आयोजित हुआ। मुख्य अतिथि महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय के कुलगुरु आचार्य मनोज दीक्षित ने कहा कि भारत का इतिहास प्रतिरोध और संस्कृतियों का इतिहास है। इसमें भाषाओं का बड़ा योगदान रहा है। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पर बोलते हुए कहा कि यह उपयोगी तो है, लेकिन लेखन में पूरी तरह विश्वसनीय नहीं। इसका प्रयोग सावधानी से करना होगा।

समारोह का शुभारंभ भगवती पारीक ‘मनु’ की सरस्वती वंदना से हुआ। मंत्री व संयोजक रवि पुरोहित ने संस्था की 65 वर्ष की विकास यात्रा साझा की।
“हिन्दी और संस्कृति एक-दूसरे से जुड़ी”
विधायक ताराचंद सारस्वत ने कहा कि भारतीय संस्कृति और हिन्दी एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी हैं। संस्कृति को बचाना है तो हिन्दी को आगे बढ़ाना होगा। उन्होंने स्वदेशी अपनाने पर भी बल दिया।

एआई पर संगोष्ठी : भावनाओं का कोई विकल्प नहीं
“हिन्दी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता- संभावनाएं और चुनौतियां” विषय पर संगोष्ठी में डॉ. उमाकांत गुप्त (पूर्व प्राचार्य, महारानी सुदर्शना बालिका महाविद्यालय बीकानेर) ने कहा कि एआई शोधार्थियों के लिए संदर्भ जुटाने में उपयोगी है, पर संवेदनाओं का विकल्प नहीं।
विशिष्ट अतिथि साहित्यकार डॉ. गजादान चारण ने कहा कि एआई कविता तो लिख सकता है, पर उसमें भावनाओं का अभाव रहता है।

पुरस्कार और सम्मान
राष्ट्रभाषा हिन्दी प्रचार समिति के अध्यक्ष श्याम महर्षि ने साहित्यिक सेवाओं का विवरण प्रस्तुत किया।
- साहित्य श्री सम्मान – डॉ. पद्मजा शर्मा
- नंदलाल महर्षि स्मृति हिन्दी सर्जन पुरस्कार – देवेंद्र कुमार मिश्रा (जबलपुर)
- सुरेश कंचन ओझा लेखन पुरस्कार – कुमार सुरेश
- चंद्र मोहन हाड़ा हिमकर स्मृति पुरस्कार – उपन्यासकार विश्वनाथ तंवर
- रामकिशन उपाध्याय समाज सेवा पुरस्कार – हरिशंकर बाहेती (राशि दुगुनी कर समिति को समर्पित की)
- शिव प्रसाद सिखवाल महिला लेखन पुरस्कार – संगीता सेठी (बीकानेर)
- शब्द शिल्पी सम्मान – सुरेश कुमार श्रीचंदानी (अजमेर)
- श्याम सुंदर नगला बाल साहित्य पुरस्कार – डॉ. नागेश पांडेय (शाहजहांपुर)

गणमान्य जनों की उपस्थिति
समारोह में बड़ी संख्या में साहित्यकार और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। इनमें डॉ. चेतन स्वामी, बजरंग शर्मा, गजानंद सेवग, मदन सैनी, सत्यदीप भोजक, महेश जोशी, सोहन ओझा, भवानी उपाध्याय, तुलसीराम चौरड़िया, विजय महर्षि, महावीर माली, विमल भाटी, नारायण सारस्वत सहित अनेक साहित्यप्रेमी शामिल रहे।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. मोनिका गौड़ ने किया।





















