प्रशासन से मदद नहीं मिली, समाजसेवियों ने दिखाई इंसानियत
NEXT 21 सितम्बर, 2025 श्रीडूंगरगढ़। कृषि मंडी परिसर के पास पिछले दो महीने से घायल हालत में पड़ा ऊंट आखिरकार जिंदगी की जंग जीत गया। आगे के पैर में गंभीर चोट और कीड़े पड़ने से हालत नाजुक हो चुकी थी। कई बार इलाज के बावजूद आश्रय स्थल न मिलने से स्थिति बिगड़ती जा रही थी।

आपणों गांव श्रीडूंगरगढ़ सेवा समिति ने प्रशासन से लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय तक गुहार लगाई, लेकिन कोई ठोस मदद नहीं मिली। अंततः सिरोही की पीपल फॉर एनिमल संस्था के संस्थापक चंद्रभान मोटवानी ने वीडियो देखकर बिना शर्त ऊंट को शेल्टर में दाखिला देने की हामी भर दी।

20 सितंबर को समिति की एंबुलेंस से अध्यक्ष जतनसिंह व उनकी टीम ने ऊंट को रेस्क्यू कर 12 घंटे में 550 किमी दूर सिरोही पहुंचाया। वहां पहुंचते ही पैर का ऑपरेशन कर कीड़े निकाले गए और पट्टियां बदल दी गईं। अब ऊंट की स्थिति पहले से काफी बेहतर है।
रेस्क्यू में जतनसिंह, शूरवीर मोदी, मनोज डागा, इंद्रसिंह, नेमाराम, पुरखाराम, कैलाश, हरि, करण, श्याम सैन, दिनेश प्रजापत सहित कई सेवादारों ने कड़ी मशक्कत की।

प्रशासन की बेरुखी पर सवाल
राज्य पशु होने के बावजूद ऊंट को आश्रय और उपचार के लिए प्रशासन से कोई मदद नहीं मिली। समिति प्रवक्ता राज सुथार ने इसे चिंताजनक स्थिति बताया और कहा कि ऐसे मामलों में सरकारी तंत्र की निष्क्रियता सवाल खड़े करती है।






















