NEXT 16 अक्टूबर, 2025 श्रीडूंगरगढ़। अखिल भारतीय साहित्य परिषद् इकाई श्रीडूंगरगढ़ की ओर से बुधवार शाम वाल्मीकि जयंती के उपलक्ष्य में वाल्मीकि बस्ती में विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ महर्षि वाल्मीकि की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन और दीप मंत्र के साथ हुआ।

कार्यक्रम में प्रांत उपाध्यक्ष मोनिका गौड़, संत मोहनदास महाराज (श्रीराम आश्रम), खंड कार्यवाह पवन गोहितान, अधिवक्ता पुखराज तेजी, अनिल वाल्मीकि, पवन शर्मा और अम्बिका डागा सहित कई गणमान्य उपस्थित रहे।
संत मोहनदास महाराज ने कहा कि आदि कवि महर्षि वाल्मीकि के जीवन से जुड़े कई पहलुओं को इतिहास में सही रूप से नहीं बताया गया। उन्होंने वाल्मीकि के जीवन दर्शन और तपस्या से जुड़े प्रेरक प्रसंग साझा किए।

मुख्य अतिथि मोनिका गौड़ ने अपने वक्तव्य में कहा कि रामायण केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं बल्कि भारतीय समाज में समरसता, संवाद और समन्वय का शाश्वत शिलालेख है। उन्होंने कहा कि वाल्मीकि ने शबरी, निषादराज गुह, वानरराज सुग्रीव और रावण जैसे पात्रों का मूल्यांकन कर्म और भावना से किया, जातीय पहचान से नहीं, यही उनके समावेशी दृष्टिकोण की पहचान है।
पवन गोहितान ने ‘वल्मीक’ शब्द का अर्थ और तपस्या से जुड़ा प्रसंग बताया, जबकि पुखराज तेजी ने कहा कि वाल्मीकि समाज मेहनत और शिक्षा के बल पर अपनी पहचान सशक्त बना सकता है। धनराज तेजी ने निराकार व साकार राम पर दोहा प्रस्तुत किया और अपनी जिज्ञासाएं रखीं, जिनका समाधान पवन शर्मा ने वाल्मीकीय रामायण के प्रसंगों से किया।
कार्यक्रम का सुंदर संचालन अम्बिका डागा ने किया। अंत में इकाई अध्यक्ष भगवती पारीक ‘मनु’ ने आभार व्यक्त करते हुए परिषद् के आगामी कार्यक्रमों की जानकारी दी। कार्यक्रम में वाल्मीकि बस्ती के अनेक लोग उपस्थित रहे। समापन कल्याण मंत्र के साथ हुआ।




















