NEXT 21 दिसम्बर, 2025 श्रीडूंगरगढ़। श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र में जमीन हड़पने का एक गंभीर मामला सामने आने के बाद NEXT द्वारा इसे प्रकाशित करके आमजन को घटना की जानकारी दी गई थी। अब पीड़ित परिवार उस मामले में न्याय की गुहार लेकर कोर्ट पहुंचा है। मामला जमीन माफियाओं द्वारा सुनियोजित तरीके से की गई धोखाधड़ी और कूटरचना का बताया जा रहा है।
आरोप है कि कुछ लोगों ने वर्षों पहले मृत हो चुके व्यक्तियों के नाम से फर्जी दस्तावेज तैयार कर जमीन की रजिस्ट्री करा ली। मामले में पीड़ित ने परेशान होकर न्यायालय की शरण ली है।
पीड़ित जितेन्द्र कुमार बोथरा ने अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, श्रीडूंगरगढ़ की अदालत में परिवाद दायर कर बताया कि उनके दादा स्व. रिद्धकरण बोथरा ने वर्ष 1969 में लखासर गांव स्थित लगभग 66 बीघा कृषि भूमि खसरा नम्बर 187 रजिस्टर्ड विक्रय पत्र के जरिए खरीदी थी। बाद में यह भूमि उनके पिता चम्पालाल सहित परिवार के अन्य सदस्यों के नाम नामांतरण में दर्ज हुई।
पीड़ित के अनुसार उनके दादा, पिता, ताऊ और बुआ का निधन वर्षों पहले हो चुका है। इसके बावजूद आरोपी लिछमण सिंह पुत्र भंवरसिंह निवासी कोलासर, चंद्रप्रकाश पुत्र बंशीलाल ब्राह्मण निवासी श्रीकोलायत, हीरालाल पुत्र गौरीशंकर पड़िहार निवासी बीकानेर ने गिरोह बनाकर मृत व्यक्तियों के नाम से फर्जी आधार कार्ड, फर्जी फोटो और फर्जी हस्ताक्षर तैयार किए। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर 10 नवंबर 2025 को भूमि का विक्रय पत्र तैयार कर 11 नवंबर 2025 को उप-पंजीयक कार्यालय श्रीडूंगरगढ़ में रजिस्ट्री करवा दी गई।
परिवाद में आरोप लगाया गया है कि इस फर्जी रजिस्ट्री में दो गवाह भी बनाए गए, जिन्होंने जानबूझकर कूटरचित दस्तावेजों का समर्थन किया। विक्रय पत्र में दर्शाई गई राशि और लेन-देन को भी पूरी तरह फर्जी बताया गया है। पीड़ित का कहना है कि वह व्यवसाय के सिलसिले में राजस्थान से बाहर रहता है और हाल ही में गांव आने पर उसे इस पूरे फर्जीवाड़े की जानकारी मिली।
थानाधिकारी ने की मामला दर्ज करने में अनदेखी
पीड़ित के अधिवक्ता मोहनलाल सोनी ने बताया कि कोर्ट में परिवाद पत्र प्रस्तुत करने से पहले श्रीडूंगरगढ़ थानाधिकारी को मामले से अवगत करवाते हुए आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का परिवाद दिया गया था। परन्तु श्रीडूंगरगढ़ थानाधिकारी ने मुकदमा दर्ज नहीं करके मामले को अनदेखा कर दिया। इसके बाद कोर्ट में परिवाद पेश किया गया।
अब पीड़ित ने अदालत से मांग की है कि पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज करके फर्जी विक्रय पत्र को जब्त कर आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। कोर्ट ने मामला दर्ज के आदेश दे दिए हैं।
















