देश में ऐसे कई संत और आध्यात्मिक गुरु हैं जिन्होंने प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों से डिग्री हासिल की और बेहतरीन नौकरी की। लेकिन फिर उन्होंने अपनी सफल पेशेवर जिंदगी छोड़कर अध्यात्म और समाजसेवा की राह चुनी। ऐसे व्यक्तित्व प्रेरणादायक हैं जो दिखाते हैं कि जीवन में असली संतोष भौतिक सुखों से नहीं, बल्कि आत्मिक शांति और दूसरों की सेवा से मिलता है। NEXT आपको ऐसे ही कुछ संतों के बारे में बता रहा है।
अभय सिंह – आईआईटी से संन्यास तक महाकुंभ में इस बार एक विशेष संन्यासी चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। उनका नाम अभय सिंह है, जिन्होंने आईआईटी से बीटेक की डिग्री हासिल की थी। इसके बाद उन्होंने एक शानदार नौकरी को छोड़कर आध्यात्मिक जीवन अपना लिया। मीडिया में दिए गए उनके इंटरव्यूज इन दिनों खूब सुर्खियां बटोर रहे हैं।
बीके शिवानी – ब्रह्मकुमारीज़ की प्रमुख ब्रह्मकुमारीज़ संगठन का प्रमुख चेहरा बीके शिवानी हैं। उन्होंने सावित्रीबाई फुले यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन और महाराष्ट्र इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से कंप्यूटर इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री ली। शुरुआती दौर में वह संगठन के बैकस्टेज काम करती थीं। 2007 में प्रवचनों के लिए आगे आईं और आज वह लाखों लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत बन चुकी हैं।
आचार्य प्रशांत – अद्वैत वेदांत के प्रचारक आचार्य प्रशांत ने आईआईटी से बीटेक और आईआईएम से एमबीए की पढ़ाई की। उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा पास करने के बाद भी नौकरी नहीं की और अद्वैत वेदांत की शिक्षा को लोगों तक पहुंचाने का कार्य शुरू किया। उनके यूट्यूब चैनल और लिखी गई किताबें लाखों लोगों तक उनकी शिक्षाएं पहुंचाती हैं। वह वीगनिज़्म और मांसाहार के विरोधी भी हैं।
अमोघ लीला दास – इस्कॉन के संत अमोघ लीला दास, जिनका असली नाम आशीष अरोड़ा है, ने दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की डिग्री ली। इसके बाद उन्होंने एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम किया, लेकिन जल्दी ही सब कुछ छोड़कर इस्कॉन से जुड़ गए। आज वह एक प्रेरणादायक वक्ता और समाजसेवी हैं।
गौर गोपाल दास – सोशल मीडिया के लोकप्रिय संत गौर गोपाल दास का जन्म महाराष्ट्र के अहमदनगर में हुआ। उन्होंने कसरो वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की डिग्री ली और एचपी कंपनी में नौकरी की। लेकिन जल्द ही उन्होंने नौकरी छोड़कर इस्कॉन से जुड़ने का निर्णय लिया। वह सोशल मीडिया पर बेहद लोकप्रिय हैं और उनकी किताब “लाइफ्स अमेज़िंग सीक्रेट्स” को खूब सराहा गया।
स्वामी मुकुंदानंद – वेदों और योग के ज्ञाता स्वामी मुकुंदानंद ने आईआईटी से बीटेक और आईआईएम से एमबीए किया। उन्होंने भी कॉर्पोरेट नौकरी छोड़कर आध्यात्मिक मार्ग चुना। वह जगद्गुरु कृपालु महाराज के शिष्य हैं और वेद, योग और ध्यान सिखाने के लिए प्रसिद्ध हैं।
श्री श्री रविशंकर – ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ के संस्थापक श्री श्री रविशंकर ने विज्ञान में डिग्री लेने के बाद आध्यात्मिकता की ओर रुख किया। उन्होंने ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ और ‘ट्रांसेंडेंटल मेडिटेशन’ की शुरुआत की, जो आज दुनियाभर में लाखों लोगों के जीवन का हिस्सा है।
इन महान हस्तियों का जीवन यह साबित करता है कि सच्ची सफलता धन और करियर में नहीं, बल्कि आत्मिक संतोष में निहित है। उन्होंने अपने उच्च शिक्षित और सफल करियर को पीछे छोड़कर मानवता और अध्यात्म की सेवा को प्राथमिकता दी।