NEXT 22 मार्च, 2025। राजस्थान विधानसभा में शुक्रवार को लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान बिल पारित कर दिया गया। इस विधेयक के तहत आपातकाल (1975-77) के दौरान 30 दिन या अधिक जेल में रहने वाले लोकतंत्र सेनानियों को दी जाने वाली पेंशन और सुविधाओं को कानूनी आधार मिल गया है। अब कोई भी सरकार केवल प्रशासनिक आदेश से यह पेंशन बंद नहीं कर सकेगी। इसके लिए विधानसभा में कानून में संशोधन करना अनिवार्य होगा।
लोकतंत्र सेनानियों को मिलेगा कानूनी संरक्षण
इस विधेयक के अनुसार, आपातकाल के दौरान जेल जाने वालों को लोकतंत्र सेनानी का दर्जा मिलेगा। वर्तमान में राज्य में ऐसे 1,100 लोग पेंशन प्राप्त कर रहे हैं। सरकार ने इसके लिए ₹40 करोड़ का बजट निर्धारित किया है।
मुख्य प्रावधान:
- निरंतर पेंशन: पात्र लोकतंत्र सेनानियों को ₹20,000 मासिक पेंशन और ₹4,000 चिकित्सा भत्ता मिलेगा।
- पारिवारिक लाभ: सेनानी की मृत्यु के बाद उनके पति या पत्नी को यह पेंशन प्राप्त होगी, बशर्ते वे 90 दिनों के भीतर आवेदन करें।
- यात्रा सुविधा: लोकतंत्र सेनानियों को राजस्थान रोडवेज में निःशुल्क यात्रा की सुविधा जारी रहेगी।
- सरकारी कार्यक्रमों में सम्मान: स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस और अन्य राष्ट्रीय पर्वों पर इन्हें सरकारी समारोहों में आमंत्रित किया जाएगा।
योग्यता जांच के लिए जिला स्तरीय कमेटी बनेगी
पेंशन के लिए पात्रता की जांच हेतु प्रत्येक जिले में एक समिति गठित की जाएगी, जिसमें प्रशासनिक अधिकारियों के साथ स्थानीय विधायक भी सदस्य होंगे।
बिल पर बहस के दौरान सुझाव
बिल पर चर्चा के दौरान कुछ विधायकों ने पेंशन के लिए जेल में रहने की न्यूनतम अवधि को 30 दिन से घटाकर 10 दिन करने और सेनानियों के जीवनसाथी को भी निःशुल्क यात्रा सुविधा देने की मांग की। संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि विधायकों के सुझावों को नियमों में शामिल करने पर विचार किया जाएगा।
मीसा और डीआईआर बंदी कौन हैं?
- मीसा बंदी: राष्ट्रीय आंतरिक सुरक्षा अधिनियम (MISA) के तहत गिरफ्तार लोग।
- डीआईआर बंदी: भारत रक्षा नियम (DIR) के तहत हिरासत में लिए गए लोग।
बिल के पारित होने से अब लोकतंत्र सेनानियों की पेंशन और सुविधाओं को कानूनी सुरक्षा मिल गई है, जिससे आने वाली सरकारें इसे आसानी से बंद नहीं कर पाएंगी।