#टॉप न्यूज़ राजस्थान NEXT विशेष जॉब/ एजुकेशन जीवन मंत्र

सांडों की लड़ाई से हुई मौत, कोर्ट ने नगर पालिका को ठहराया दोषी, 44 लाख का हर्जाना देने का आदेश

By Next Team Writer

Published on:

NEXT 3 अप्रैल, 2025। सोजत सिटी में बेसहारा सांडों की वजह से हुई युवा मेहंदी कारोबारी की मौत के मामले में अपर एवं सत्र न्यायाधीश दिनेश कुमार गढ़वाल ने नगर पालिका प्रशासन को जिम्मेदार ठहराते हुए 44 लाख 10 हजार 480 रुपये हर्जाने का आदेश दिया है। कोर्ट ने नगर पालिका ईओ, सभापति और स्वायत्त शासन विभाग को लापरवाही के लिए दोषी मानते हुए मृतक के आश्रितों को क्षतिपूर्ति राशि देने के निर्देश दिए हैं।

10 साल पहले हुई थी घटना

घटना 21 मई 2015 की है, जब सोजत सिटी के मेहंदी उद्यमी 45 वर्षीय नरेंद्र टांक उर्फ गुड्डूसा बाइक से घर लौट रहे थे। इसी दौरान सड़क पर दो सांडों की लड़ाई में उनकी बाइक चपेट में आ गई। सांड के सींग से सिर पर गंभीर चोट लगने के कारण नरेंद्र टांक घायल हो गए और इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। हादसे के बाद पत्नी ज्योति टांक, पुत्र कुणाल और बेटी भूमिका ने नगर पालिका ईओ, अध्यक्ष, स्वायत्त शासन विभाग और राज्य सरकार के खिलाफ केस दर्ज कराया था।

नगर पालिका ने किया था दावा- शहर में बेसहारा पशु नहीं

कोर्ट में सुनवाई के दौरान नगर पालिका के तत्कालीन अध्यक्ष और अधिशासी अभियंता ने जवाब में दावा किया कि नगर पालिका क्षेत्र में बेसहारा पशु नहीं हैं और नरेंद्र की मौत किस तरह हुई, इसकी जानकारी नहीं है। हालांकि, पुलिस जांच में स्पष्ट हुआ कि बेसहारा सांडों की लड़ाई के कारण नरेंद्र की मौत हुई थी।

कोर्ट ने प्रशासन को ठहराया दोषी

पुलिस ने जांच में पाया कि गाय और सांड सड़क पर भटक रहे थे और दो सांड आपस में लड़ते हुए मृतक की बाइक से टकरा गए, जिससे सिर और फेफड़ों में गंभीर चोटें आने से नरेंद्र टांक की मृत्यु हो गई। पुलिस ने यह भी बताया कि नगर पालिका की उपेक्षा के कारण मुख्य सड़कों पर बेसहारा पशु उत्पात मचा रहे थे। इस आधार पर कोर्ट ने 29 मार्च को फैसला सुनाते हुए नगर पालिका को दोषी मानते हुए हर्जाने का आदेश दिया।

बेसहारा गौवंश बना खतरा, आमजन पर मंडरा रहा खतरा

इस दर्दनाक घटना से साफ है कि बेसहारा गौवंश आमजन के लिए कितना बड़ा खतरा बन चुका है। खुलेआम घूम रहे सांडों की लड़ाई के कारण आए दिन लोग चोटिल हो रहे हैं। तेज गति से दौड़ते और लड़ते हुए सांड राहगीरों, दुपहिया और चौपहिया वाहनों से टकरा जाते हैं, जिससे गंभीर दुर्घटनाएं हो रही हैं। शहरों में आवारा पशुओं की यह समस्या विकराल होती जा रही है, लेकिन प्रशासन इसे गंभीरता से नहीं ले रहा।

श्रीडूंगरगढ़ में भी बेसहारा सांडों का आतंक, प्रशासन मौन

इधर, श्रीडूंगरगढ़ कस्बे में भी नगर पालिका प्रशासन की उदासीनता के चलते मुख्य बाजार और सड़कों पर आए दिन सांडों की लड़ाई देखने को मिलती है। इन बेसहारा पशुओं के कारण कई राहगीर घायल हो चुके हैं, दुकानदारों को नुकसान उठाना पड़ा है और यातायात प्रभावित हुआ है। इसके बावजूद प्रशासन कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा। स्थानीय लोग लंबे समय से नगर पालिका से उचित प्रबंधन की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है। यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो भविष्य में और भी बड़ी दुर्घटनाएं हो सकती हैं।

एक्सपर्ट लीगल राय

कानून के अंतर्गत नगरपालिका का यह कर्त्तव्य है कि वह आवागमन के मार्ग निर्बाध चालू रखें। बेसहारा पशुओं को गौशाला या अन्य उचित स्थान पर रखने की व्यवस्था करें।
अगर, नगर पालिका द्वारा इस कर्तव्य का निर्वहन नहीं किया जा रहा है तो अपकृत्य विधि द्वारा किसी व्यक्ति, वस्तु को नुकसान बेसहारा पशुओं के कारण होता है तो उस सम्बंध में नगरपालिका के विरुद्ध कार्यवाही की जा सकती है।
नगरपालिका अधिनियम की धारा- 248 में यह प्रावधान किया गया है कि कोई चौपाया पशु किसी सार्वजनिक स्थान पर घूमता पाया जाता है, जो जनता के लिए खतरा साबित हो सकता है, तो ऐसे पशुओं को पालिका परिबद्ध कर सकती है और पालिका द्वारा उन पशुओं की नीलामी भी की जा सकती है।
मोहनलाल सोनी, वरिष्ठ अधिवक्ता

Next Team Writer

हम, कमल और नारायण, हमें खुशी है कि हम NEXT टीम का हिस्सा है। यहाँ पर हमें कंटेंट मैनेजमेंट की जिम्मेदारी सौंपी गई है। हमारा उद्देश्य आपको हर विषय पर सटीक और विस्तृत जानकारी प्रदान करना है। यदि आपको किसी भी विषय पर जानकारी की आवश्यकता हो या कोई सवाल हो, तो आप बेझिझक हमसे संपर्क कर सकते हैं। हमारा प्रयास है कि आपको पूरी और सही जानकारी मिले।

Advertisement placement

Leave a Comment

WhatsApp Join WhatsApp Group