NEXT 6 जनवरी, 2025 श्रीडूंगरगढ़। अपर सेशन न्यायालय, श्रीडूंगरगढ़ ने दुष्कर्म के एक मामले में आरोपी को सन्देह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। अपर सेशन न्यायाधीश सरिता नौशाद ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद यह फैसला सुनाया।
मामला करीब 10 वर्ष पुराना है। परिवादिनी ने 17 जुलाई 2015 को आरोप लगाते हुए बताया था कि 5 जुलाई 2015 की रात करीब 12 बजे गोविंदराम पुत्र पूर्णाराम ने नाजायज रूप से घर में घुसकर उसके साथ दुष्कर्म किया।
परिवादिनी के अनुसार, इसके बाद 15 जुलाई 2015 को सुबह करीब 11 बजे गोविंदराम पुत्र पूर्णाराम, पूर्णाराम पुत्र नानूराम, भूराराम पुत्र नानूराम, भंवरी पत्नी भूराराम और दुर्गा पत्नी पूर्णाराम एकराय होकर उसके घर में जबरदस्ती घुसे और उसे जबरन उठाकर ले जाने का प्रयास किया। इस दौरान पड़ोसियों के हस्तक्षेप से वह बच सकी। आरोप है कि जाते समय आरोपी उसके सोने का मादलिया, पाजेब और मोबाइल फोन भी छीन ले गए।
घटना के संबंध में बाद में जरिये इस्तगासा मामला दर्ज कराया गया था।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से अधिवक्ता अबरार मोहम्मद एवं राजीव आत्रेय ने पैरवी की। न्यायालय ने अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों में पर्याप्त पुष्टि नहीं पाए जाने पर मुख्य आरोपी गोविंदराम को संदेह का लाभ देते हुए बरी करने के आदेश दिए।
10 साल पुराने दुष्कर्म मामले में आरोपी बरी, एडीजे कोर्ट ने दिया संदेह का लाभ

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