NEXT द्वारा आमजन के लिए चलाए गए एक महत्त्वपूर्ण टॉपिक “लीगल एडवाइज” को पाठकों द्वारा बहुत ज्यादा पसंद किया जा रहा है। हमारे साथ इस महत्त्वपूर्ण टॉपिक में कानूनी ढंग से बात आमजन तक पहुंचाने के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता मोहनलाल सोनी जुड़े हुए हैं।
उनकी ही टीम सदस्या दीपिका सोनी और दीपिका करनाणी द्वारा कानूनी राय सम्बन्धित आलेख तैयार किये जाते हैं ताकि आमजन को भी कानून की आवश्यक जानकारी हो।
फर्जीवाड़ा के संबंध में कानूनी प्रावधानों के बारे में इस आलेख में बताया जा रहा है।

फर्जीवाड़ा दस्तावेजों व संपत्तियों के संबंध में होता है। फर्जीवाड़ा एक अपराध है जिसके संबंध में भारतीय न्याय संहिता की धारा 335 से 350 में उल्लेख है।
धारा 335 में बताया गया है कि कोई व्यक्ति बेईमानी से या कपटपूर्वक आशय से किसी दस्तावेज या दस्तावेज के किसी भाग को तैयार करता है या हस्ताक्षरित करता है छापता है या किसी इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को या उसके किसी भाग को तैयार करता है या प्रसारित करता है तो यह कहा जा सकता है कि उसे व्यक्ति ने कूट रचना यानी फर्जीवाड़ा किया है।
हम इसे एक उदाहरण से समझेंगे जैसे कि एक व्यक्ति ने किसी से ₹10000/रुपये उधार लेने की लिखित लिखकर दी। जिस व्यक्ति ने ₹10000रुपये उधार दिए थे, उसने बेईमानी से ₹10000/-रुपये की राशि में एक शून्य बढ़ा दिया ताकि वह व्यक्ति ₹100000/- रुपये लेने का अधिकारी हो जाये। ऐसे में अब कहा जाएगा कि उसे व्यक्ति ने शून्य बढ़ाकर फर्जीवाड़ा किया है। धारा 336 में कूट रचना को फर्जीवाड़ा बताया गया है।
कोई व्यक्ति फर्जीवाड़ा किसी व्यक्ति को नुकसान या क्षति पहुंचाने या किसी हक का अधिकार हासिल करने या धोखा देने के आशय से करता है तो धारा 336 (3) के अंतर्गत दोषी व्यक्ति को 7 साल की सजा और जुर्माने से दंडित किया जा सकता है।
धारा 338 के अंतर्गत कोई व्यक्ति वसीयत/ गोदनामा/ विक्रियपत्र/ दान पत्र/ चेक/ प्रॉमिससरी नोट /रसीद आदि के संबंध में फर्जीवाड़ा करता है तो उसे आजीवन कारावास और जुर्माने से दंडित किया जावेगा।
धारा 343 के अनुसार अगर कोई व्यक्ति वसीयत/गोदनामा/विक्रय पत्र आदि मूल्यवान दस्तावेजों को कपटपूर्वक आशय से रद्द या नष्ट करता है तो उसे आजीवन कारावास से दंडित व जुर्माने से दंडित किया जा सकता है।
धारा 339 के अनुसार अगर कोई व्यक्ति फर्जी दस्तावेज को असली रूप में काम में लेने के उद्देश्य से अपने कब्जे में रखता है तो उसे 7 साल के कारावास व जुर्माने से दंडित किया जा सकता है।
धारा 344 के अनुसार कोई लिपिक/अधिकारी/कर्मचारी किसी अकाउंट या बहीखाता जानबूझकर कपटपूर्वक आशय से नष्ट करेगा या उनमें परिवर्तन करेगा तो उसे 7 साल के कारावास व जुर्माने से दंडित किया जाएगा।
फर्जीवाड़ा के बारे में हम और भी जानेंगे…अगले अंक में…पढ़ते रहिये और जुड़े रहें NEXT से