
अनुबंध (Contract) एक ऐसा समझौता (Agreement) होता है, जिसमें दो या दो से अधिक व्यक्तियों या समूहों के मध्य वचनबद्धता तय की जाती है और जिसे कानूनी रूप से लागू किया जा सके। यह समझौता दोनों पक्षों के लिए मान्य होता है और उनके द्वारा सहमति से किया जाता है।
अनुबंध के मूल तत्व
एक अनुबंध में एक पक्षकार द्वारा स्पष्ट रूप से प्रस्ताव दिया जाता है और दूसरे पक्षकार द्वारा वैधानिक रूप से उसे स्वीकार किया जाता है। अनुबंध करने वाले व्यक्ति या पक्षकार कानूनी रूप से सक्षम होने चाहिए। यानी नाबालिग, मानसिक रूप से अस्वस्थ या विकृतचित्त व्यक्ति अनुबंध करने के लिए सक्षम नहीं होते। ऐसे व्यक्तियों द्वारा किया गया अनुबंध कानूनी रूप से अमान्य होता है।
इसके अतिरिक्त, अनुबंध का उद्देश्य वैध होना चाहिए। कोई भी अवैधानिक कार्य या किसी सार्वजनिक नीति के विरुद्ध किया गया अनुबंध कानूनन मान्य नहीं होता। यदि कोई पक्ष अनुबंध की शर्तों का पालन नहीं करता है, तो इसे न्यायालय के माध्यम से शर्तों की पालना करने हेतु बाध्य करवाया जा सकता है।
अनुबंध के प्रकार
अनुबंध विभिन्न प्रकार के होते हैं, जिनमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित शामिल हैं:
- द्विपक्षीय अनुबंध (Bilateral Contract): इस प्रकार के अनुबंध में दोनों पक्ष किसी कार्य को करने या करवाने के लिए वचनबद्ध होते हैं। उदाहरण के लिए, विक्रेता और क्रेता के बीच किया गया बिक्री अनुबंध।
- एकपक्षीय अनुबंध (Unilateral Contract): इसमें केवल एक पक्ष कार्य पूरा होने पर कुछ देने का वचन देता है। जैसे, कोई व्यक्ति अपने खोए हुए सामान को खोजकर लाने वाले को इनाम देने की घोषणा करता है।
- शून्यकरणीय अनुबंध (Voidable Contract): यह ऐसा अनुबंध होता है जिसे कानूनी रूप से शून्य घोषित कराया जा सकता है। उदाहरण के लिए, यदि कोई नाबालिग कोई अनुबंध करता है, तो वह बालिग होने के बाद उसे रद्द कर सकता है।
- अमान्य अनुबंध (Void Contract): ऐसा अनुबंध जो अवैध या गैर-कानूनी कार्य के लिए किया गया हो, कानून द्वारा मान्य नहीं होता। उदाहरण के रूप में, किसी अपराध को अंजाम देने के लिए किया गया अनुबंध।
अनुबंध के व्यावहारिक उदाहरण
वर्तमान समय में अनुबंध व समझौता विभिन्न क्षेत्रों में किए जाते हैं, जिनमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित शामिल हैं:
- रोजगार अनुबंध (Employment Contract): नियोक्ता और कर्मचारी के बीच होने वाला अनुबंध।
- विक्रय अनुबंध (Sale Contract): विक्रेता और क्रेता के बीच वस्तु के विक्रय हेतु किया गया अनुबंध।
- लीज समझौता (Lease Agreement): जमीन, मकान या अन्य संपत्ति को किराए या लीज पर देने का समझौता।
- ऋण समझौता (Loan Agreement): बैंक और ऋणी के मध्य ऋण संबंधी समझौता।
- सेवा अनुबंध (Service Contract): सेवा प्रदाता और ग्राहक के बीच किया गया अनुबंध।
कॉन्ट्रैक्ट और अग्रीमेंट में मुख्यतया अंतर:
एक समझौता कानूनी रूप से बाध्य भी हो सकता है और कानूनी रूप से मान्य नहीं करने योग्य भी हो सकता है। परन्तु अनुबंध कानूनी रूप से बाध्यकारी और कानून द्वारा लागू करने योग्य होता है। जिसमें ऐसी शर्तें होती है जिनका दोनों पक्षों द्वारा अनुपालन आवश्यक है।
निष्कर्ष
हर अनुबंध (Contract) एक समझौता (Agreement) होता है, लेकिन हर समझौता अनुबंध नहीं होता। अनुबंध कानूनी रूप से बाध्यकारी होता है और यदि कोई पक्ष अपनी वचनबद्धता से मुकरता है, तो इसे न्यायालय के माध्यम से लागू करवाया जा सकता है। इसलिए, किसी भी अनुबंध को करते समय उसके कानूनी पहलुओं और शर्तों को भली-भांति समझ लेना आवश्यक होता है।