NEXT 8 अप्रैल, 2026 श्रीडूंगरगढ़। कालूबास में चल रही सप्तदिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन कथावाचक संतोष सागर महाराज ने श्रद्धालुओं को भक्ति और आत्मज्ञान का संदेश दिया। कथा के दौरान उन्होंने गोवर्धन धारण प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया कि भगवान ने ब्रह्मा और इन्द्र के अपराध को क्षमा किया।

उन्होंने कहा कि इन्द्र के कोप से ब्रज में अतिवृष्टि हुई और पूरा क्षेत्र संकट में आ गया। ऐसे समय भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी अंगुली पर धारण कर ब्रजवासियों की रक्षा की। इस प्रसंग से सीख देते हुए उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति भक्तों को भगवान से जोड़ता है, उसके अपराध भी प्रभु क्षमा कर देते हैं।
कथा में रासलीला और गोपी-गीत का भावपूर्ण वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि भागवत के दशम स्कंध के पांच अध्याय, जिन्हें रास पंचाध्यायी कहा जाता है, भक्ति का सर्वोच्च शिखर हैं। ये अध्याय भक्त को अपनी आध्यात्मिक स्थिति समझने का मार्ग प्रदान करते हैं।
उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि सत्संग की बातों को जीवन में अपनाएं, जिससे मन की निर्मलता बढ़े। उन्होंने कहा कि भागवत केवल देह की नहीं, बल्कि आत्मा की कथा है।
कथा के दौरान प्रस्तुत की गई आकर्षक झांकियों ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।



















