NEXT 21 सितम्बर, 2025 श्रीडूंगरगढ़। सर्वपितृ अमावस्या के मौके पर सारस्वा परिवार ने अपने पूर्वजों की स्मृति में गौसेवा कर अनूठी मिसाल पेश की।

गांव के महेंद्र पुत्र स्व. किशनाराम सारस्वा एवं घनश्याम व रामनिवास पुत्रगण स्व. जयकुमार सारस्वा ने रविवार को करणी गौशाला पहुंचकर विशेष भोग तैयार करवाया। उन्होंने ढाई क्विंटल लापसी का महाप्रसाद बनवाया और 2 क्विंटल 51 किलो खल-चूरी को भिगोकर गौमाताओं को अपने हाथों से भोग लगाया।
गौशाला प्रबंधन समिति के रामचंद्र भादू ने सारस्वा परिवार का आभार जताया। उन्होंने कहा कि “यह केवल दान नहीं बल्कि संस्कारों से जुड़ने का प्रयास है। यहां सहयोग राशि का महत्व नहीं, बल्कि खुद की मौजूदगी का महत्व है। एक बार आने के बाद बार-बार आने का मन करता है।”
उन्होंने यह भी संदेश दिया कि घर में जन्मदिन, वैवाहिक वर्षगांठ या फिर पूर्वजों की पुण्यतिथि जैसे अवसर पर गौसेवा कर पुण्य कमाया जा सकता है।
सारस्वा परिवार की इस पहल ने ग्रामीणों को भी प्रेरित किया। लोगों ने कहा कि इस तरह के आयोजन से न सिर्फ पूर्वजों की स्मृति जीवित रहती है बल्कि समाज में सेवा भाव भी मजबूत होता है।




















