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जैन धर्म का मृत्यु महोत्सव: 97 वर्षीय तोलाराम बोथरा ने संथारे का किया प्रत्याख्यान

By Next Team Writer

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NEXT 4 मार्च, 2025 । कस्बे के प्रतिष्ठित श्रावक तोलाराम बोथरा (सुपुत्र स्व. भोमराज बोथरा) ने आज दोपहर 3:21 बजे संथारा का प्रत्याख्यान किया। श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा, तेरापंथ महिला मंडल, तेरापंथ युवक परिषद के पदाधिकारी एवं समाज के गणमान्य श्रावक-श्राविकाओं की साक्षी में तोलाराम द्वारा संथारा (संलेखना) का  प्रत्याख्यान किया गया।

आचार्य महाश्रमण की आज्ञा से एवं पारिवारिक परिजनों की सहमति से सेवा केंद्र व्यवस्थापिका साध्वी  संगीतश्री और डॉ. साध्वी परमप्रभा ने संथारा विधि का पचखान करवाया। इस अवसर पर बोथरा निवास पर साध्वियों व समाजजनों की उपस्थिति में संथारा विधि की घोषणा की गई।

पारिवारिक जनों में भाई छगनलाल बोथरा तथा सुपुत्र संपतमल, पूनम चंद, सागरमल, गुलाबचंद और पौत्र राहुल बोथरा भी उपस्थित रहे।

संथारा (संलेखना) जैन धर्म की विशिष्ट साधना: संथारा एक जैन धर्म की विशिष्ट साधना है, जिसमें व्यक्ति आत्मशुद्धि और मोक्ष प्राप्ति की भावना से स्वेच्छा से अन्न-जल का त्याग करता है। इसमें गुरु की आज्ञा से साधक मृत्यु के समरांगण में मृत्यु का वरण करता है। इस दौरान साधक के आवास पर भजन- कीर्तन निरन्तर चलते रहते हैं।

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