NEXT 7 अप्रैल, 2026 श्रीडूंगरगढ़। कालूबास स्थित मोहता पैलेस में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पंचम दिवस पर युवा कथावाचक संतोष सागर महाराज ने संगीतमय कथा वाचन से श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। कथा में बालकृष्ण की विविध लीलाओं का रोचक वर्णन किया गया, जिसे सुनकर उपस्थित श्रद्धालु भक्ति रस में डूब गए।

महाराज ने कहा कि सुख-दुख का अनुभव तो पशु भी करते हैं, लेकिन वास्तविक आनंद की अनुभूति केवल शुद्ध हृदय से ही संभव है। उन्होंने बताया कि संसार दुखों का घर है, यहां आसक्ति रखने से दुख ही प्राप्त होता है, जबकि भगवान का आश्रय लेने वाला व्यक्ति सच्चे सुख और आनंद को प्राप्त करता है।
कथा के दौरान उन्होंने वैष्णव की परिभाषा बताते हुए कहा कि भगवान शिव सबसे बड़े वैष्णव हैं, जो भगवान विष्णु के सभी रूपों के उपासक हैं और कृष्ण की लीलाओं के दर्शन के लिए गोकुल तक आते हैं। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति महादेव की शरण में चला जाता है, उसे जीवन में रोना नहीं पड़ता।

पूतना प्रसंग का उल्लेख करते हुए महाराज ने कहा कि अविद्या ही मनुष्य को अपवित्र बनाती है। पूतना का अर्थ अपवित्रता है, इसलिए जीवन में भाव की शुद्धि आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भाव प्रधान व्यक्ति में थोड़ा ज्ञान भी होना चाहिए।
महाराज ने गृहस्थ जीवन के लिए संदेश देते हुए कहा कि घर का मंदिर स्वच्छ और व्यवस्थित होना चाहिए। अधिक तस्वीरों की आवश्यकता नहीं है, बल्कि भगवान को घर का सदस्य मानकर उनकी सेवा करनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि भगवान से औपचारिक नहीं, बल्कि आत्मीय संबंध रखना चाहिए।
कथा के अंत में श्रद्धालुओं ने भजनों पर झूमते हुए भगवान श्रीकृष्ण के जयकारे लगाए।



















