NEXT 4 मार्च, 2025। राजस्थान में फर्जी डॉक्टरों के इलाज से लगातार बच्चों की मौत हो रही है। पिछले 10 दिनों में दो नाबालिग इसकी चपेट में आ चुके हैं। हालिया मामले चित्तौड़गढ़ और सिरोही जिलों से सामने आए हैं।
चित्तौड़गढ़ के रतनपुरा गांव में झोलाछाप डॉक्टर गोपाल दत्ता के इलाज से 8वीं कक्षा की छात्रा विशाखा धाकड़ की मौत हो गई। घटना के 12 दिन बाद भी आरोपी खुलेआम इलाज कर रहा है।
इलाज के नाम पर तीन घंटे तक रोका, बिगड़ गई हालत
रतनपुरा गांव की 15 वर्षीय विशाखा धाकड़ कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में पढ़ती थी। 21 फरवरी को तबीयत बिगड़ने पर शिक्षक ने उसके पिता संतोष धाकड़ को सूचना दी। पिता उसे गांव के झोलाछाप डॉक्टर गोपाल दत्ता के पास ले गए।
दत्ता ने बच्ची को ड्रिप चढ़ाई और दवाइयां दीं। करीब तीन घंटे तक इलाज करने के बाद जब उसकी हालत और बिगड़ने लगी तो डॉक्टर ने परिजनों से कहा कि उसे सरकारी अस्पताल ले जाएं। रावतभाटा उपजिला अस्पताल से बच्ची को कोटा रेफर किया गया, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।
घर को बना लिया नया क्लिनिक, प्रशासन बेखबर
बच्ची की मौत के बाद गोपाल दत्ता ने अपना क्लिनिक बंद कर दिया, लेकिन अब उसने घर पर ही इलाज शुरू कर दिया है। जब पत्रकारो की टीम झोलाछाप डॉक्टर के घर पहुंची तो वहां चारपाई पर मरीजों का इलाज हो रहा था। ड्रिप की बोतल रस्सी के सहारे लटकी थी, और मरीज अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे।
जांच के दौरान खुलासा
मामले की जांच कर रहे BCMO (ब्लॉक चीफ मेडिकल ऑफिसर) ने जब आरोपी से पूछताछ की तो वह कोई प्रमाणपत्र नहीं दिखा सका।
- BCMO: आपके पास पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड का सर्टिफिकेट है?
- गोपाल दत्ता: नहीं है।
- BCMO: क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट में रजिस्ट्रेशन है?
- गोपाल दत्ता: नहीं है सर।
- BCMO: तो फिर इलाज कैसे कर रहे हो?
- गोपाल दत्ता: मैंने कोई इंजेक्शन नहीं लगाया।
प्रशासन की लापरवाही पर सवाल
बच्ची की मौत के बाद भी आरोपी पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई है। ग्रामीण इलाकों में फर्जी डॉक्टरों की बढ़ती संख्या प्रशासन की नाकामी को दर्शाती है। मामले में अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है, जिससे ऐसे फर्जी चिकित्सकों के हौसले बुलंद हैं। वहीं, श्रीडूंगरगढ़ में भी झोलाछाप डॉक्टर पैर पसार रहे हैं।