NEXT 5 फरवरी, 2025। राजस्थान में सिंचाई के पानी की किल्लत को लेकर किसान एक बार फिर आंदोलन की राह पर हैं। श्रीगंगानगर में तीन दिनों से किसान एकजुट हो रहे हैं, वहीं मंगलवार को लूणकरणसर में भी किसानों की महापंचायत ने आंदोलन को हवा दे दी। हालात 2005 के घड़साना आंदोलन जैसे बनने लगे हैं।
इस साल फरवरी में सिंचाई का पानी बंद होने के कारण किसानों की फसलें सूखने लगी हैं। घड़साना आंदोलन के समय अक्टूबर से ही पानी की कटौती को लेकर विरोध शुरू हो गया था, लेकिन इस बार तो पूरी सिंचाई हो जाने के बाद पानी बंद किया गया है। किसानों का कहना है कि ऐसे में गेहूं, जौ और चने की फसलें बर्बाद होने की कगार पर हैं। जैसलमेर में चने की फसल को पर्याप्त सिंचाई पानी तक नहीं मिला।
पौंग डेम के हालात चिंताजनक
सिंचाई पानी की इस समस्या के बीच पौंग डेम में भी पानी का संकट गहरा गया है। डेम में इतना ही पानी बचा है कि जून तक सिर्फ पीने के पानी की आपूर्ति संभव है। अगर सिंचाई के लिए पानी छोड़ा गया तो पश्चिमी राजस्थान के करीब ढाई करोड़ लोग पीने के पानी के संकट से जूझ सकते हैं।
किसानों में बढ़ रहा आक्रोश
अभी अलग-अलग तहसीलों में किसान लामबंद हो रहे हैं, लेकिन जैसे-जैसे फसलें सूखेंगी, वैसे-वैसे विरोध तेज होने की आशंका है। किसान नेताओं का कहना है कि सरकार को जल्द से जल्द कोई समाधान निकालना होगा, नहीं तो आंदोलन बड़े स्तर पर किया जाएगा।

मंगलवार को लूणकरणसर में जलसा आयोजित
मंगलवार को लूणकरणसर में संयुक्त किसान मोर्चा के तत्त्वावधान में किसानों ने रबी फसल के लिए दो बारी सिंचाई पानी और कृषि कुंओं पर छह घंटे बिजली की मांग को लेकर जलसा आयोजित किया। जलसे में पहुंचे डॉ. राजेंद्र मूँड ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि डबल इंजन सरकार किसानों को बर्बाद कर देगी।
किसानों ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो आगामी 10 फरवरी को उपखंड अधिकारी कार्यालय पर पड़ाव डाला जाएगा।
जलसे में मौजूद प्रमुख नेता:
किसान नेता महीपाल सारस्वत, निर्दलीय उम्मीदवार प्रभुदयाल शर्मा, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष अजय गोदारा, किसान सभा अध्यक्ष मांगीलाल गोदारा, तोलाराम गोदारा, पूर्व उपप्रधान गफूर ख़ान, रामप्रताप पटीर, गोकुल भादू, आत्माराम पूनिया, धर्मवीर गोदारा, रघुवीर सिंघाठीया, विक्रम स्वामी, विकास चौधरी, दीपक शर्मा, गणपत चोटिया, भागीरथ गोदारा, रजीराम नाई, गणपतराम मेघवाल, विष्णु मांझू, कालूराम सियाग, पूर्व सरपंच हेतराम मेघवाल व पूर्व सरपंच जगदीश मेघवाल सहित कई किसान नेता इस प्रदर्शन में शामिल हुए।