NEXT 31 अगस्त, 2025 श्रीडूंगरगढ़। संस्कृति भवन में रविवार को राष्ट्रभाषा हिंदी प्रचार समिति की ओर से गीतों का गजरा सजाया गया। कार्यक्रम में कवियों ने काव्य रसधारा बहाई और श्रोताओं को देर तक बांधे रखा।

कवि अनिल कुमार ‘रजन्यंश’ ने “मन के टूटे सब तार…” सुनाकर वाहवाही लूटी। इंस्टाग्राम पर तंज कसते हुए उन्होंने बढ़ते तकनीकी दखल पर चिंता भी जताई।
डॉ. विमला महरिया ने लोकगीत बावनिया सुनाकर माहौल को हल्का-फुल्का किया। उन्होंने तकनीक के चलते होली का रंग फीका पड़ने पर व्यंग्य भी सुनाया।
कवि प्रदीप महरिया ने राजनीति और भ्रष्टाचार पर राजस्थानी गीतों के जरिए तीखे तीर चलाए।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छैलू चारण ‘छैल’ ने करणी अराधना से शुरुआत की। उन्होंने वात्सल्य और श्रृंगार रस पर रचनाएँ प्रस्तुत कर भावनाओं को छुआ। राजस्थानी भाषा को मान्यता नहीं मिलने पर राजनीति को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा— “नेतावां को करें गुणगान निज मान भूल गया…”
कवियत्री भगवती पारीक ‘मनु’ ने मंच संचालन किया। संस्था ने सभी कवियों का सम्मान किया। अध्यक्ष श्याम महर्षि ने युवाओं को जिम्मेदारी से साहित्य साधना करने की प्रेरणा दी। वहीं सत्यदीप भोजक ने सभी का आभार जताया।

कार्यक्रम में डॉ. चेतन स्वामी, मंत्री रवि पुरोहित, डॉ. मदन सैनी, सत्यनारायण योगी, रामचन्द्र राठी, नारायण सारस्वत, महेश जोशी, महावीर सारस्वत, तुलसीराम चोरड़िया, विजय महर्षि, सरोज शर्मा, मनसा सोनी, पवन सारस्वत, विश्वनाथ तंवर, अब्दुल शकूर सिसोदिया, पूनमचंद गोदारा, प्रदीप कुमार दीप, बुधमल सैनी, शुभकरण पारीक, मुकेश कुमार, राज सर, अमित सहित बड़ी संख्या में काव्यप्रेमी मौजूद रहे।




















