
धारा 18 (2-क) के अनुसार, यदि पति ने पत्नी का बिना किसी उचित कारण के परित्याग कर रखा हो।
धारा 18 (2-ख) के अनुसार, यदि उसका पति उसके साथ क्रूरता का व्यवहार करता है।
धारा 18 (2-घ) के अनुसार, यदि पति की कोई अन्य पत्नी जीवित है।
धारा 18 (2-ड़) के अनुसार, यदि उसका पति किसी उप पत्नी के साथ निवास करता हो।
धारा 18 (2- च) के अनुसार, यदि उसके पति ने हिन्दू धर्म से अन्य धर्म में अपने आपको सम्परिवर्तित कर लिया हो।
धारा 19 के अनुसार, एक विधवा पुत्रवधु अपने ससुर से भी भरण-पोषण प्राप्त करने की अधिकारिणी होगी।
धारा 20 के अनुसार बालक व वृद्ध माता-पिता भी भरण-पोषण प्राप्त करने के अधिकारी होते हैं।
उपरोक्त आधारों में से कोई एक आधार होने पर पत्नी अपने पति से अलग रहते हुए भरण-पोषण प्राप्त करने की अधिकारिणी होगी।
यहां यह उल्लेखनीय है कि एक अविवाहित पुत्री चाहे वह बालिग हो, अपने पिता से भरण-पोषण प्राप्त करने की अधिकारिणी होगी।