NEXT 14 मार्च, 2025 श्रीडूंगरगढ़ – राजस्थानी लोक संस्कृति के संरक्षण और संवर्द्धन के उद्देश्य से मोमासर में आयोजित त्रिदिवसीय “मोमासर होली उत्सव” भव्यता के साथ संपन्न हुआ। गींदड़ कमेटी और ग्रामवासियों द्वारा आयोजित इस महोत्सव ने लोक संस्कृति की जीवंत परंपरा को नया आयाम दिया।

चंग और घूमर प्रतियोगिता में लोक कलाकारों का जलवा
उत्सव के पहले चरण में मोमासर के मुख्य बाजार में चंग और घूमर प्रतियोगिता आयोजित हुई, जिसमें आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की प्रतिभाशाली टीमों ने भाग लिया। राजस्थानी परंपरा से ओत-प्रोत इन प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

प्रतियोगिता के दौरान श्रीडूंगरगढ़ विधायक ताराचंद सारस्वत, विश्वकर्मा कौशल विकास बोर्ड के अध्यक्ष रामगोपाल सुथार, एसडीएम उमा मित्तल, थानाधिकारी जितेंद्र स्वामी, श्रीडूंगरगढ़ भाजपा शहर अध्यक्ष एडवोकेट राधेश्याम दर्जी, वरिष्ठ अधिवक्ता मोहनलाल सोनी सहित कई गणमान्य नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। उन्होंने लोक संस्कृति को जीवंत बनाए रखने वाले कलाकारों, आयोजकों और कार्यकर्ताओं की सराहना करते हुए कहा कि होली केवल रंगों का नहीं, बल्कि भाईचारे और सामाजिक समरसता का पर्व भी है।

रात्रि में गींदड़ की धूम, लोक रसिकों का अद्भुत समागम

रात्रि 10 बजे से राजस्थानी गींदड़ नृत्य का भव्य आयोजन हुआ, जिसमें श्रीडूंगरगढ़ और आसपास के कस्बों के हजारों लोक रसिक उमड़े। पारंपरिक वेशभूषा में सजे कलाकारों ने मनमोहक स्वांग रचे, जिसने दर्शकों को लोक संस्कृति की गहराई से जोड़ दिया।


NEXT ने किया उत्सव का लाइव प्रसारण
राजस्थान की सांस्कृतिक छटा बिखेरने वाले इस महोत्सव का NEXT ने आधिकारिक रूप से “मोमासर महोत्सव” के रूप में लाइव प्रसारण किया। आयोजकों, प्रायोजकों और गींदड़ कमेटी ने NEXT को यह दायित्व सौंपा, जिसे दर्शकों का भरपूर स्नेह मिला। लाइव प्रसारण को 1000 से 2000 दर्शकों ने लगातार देखा, जिससे यह उत्सव वैश्विक स्तर पर भी पहुंचा।
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संस्कृति के संरक्षण की अनूठी पहल
उप प्रशासक जुगराज संचेती ने बताया कि भामाशाह सुरेंद्र पटावरी, बेल्जियम और अरुण संचेती, कोलकाता द्वारा प्रायोजित और गींदड़ कमेटी मोमासर द्वारा आयोजित मोमासर होली उत्सव न केवल एक परंपरा का निर्वहन था, बल्कि यह राजस्थानी लोक संस्कृति के संरक्षण और उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सार्थक प्रयास भी था। इस तरह के आयोजनों से क्षेत्रीय कलाकारों को मंच मिलता है, लोक धरोहर जीवंत रहती है और सामाजिक समरसता को बढ़ावा मिलता है।
















