NEXT 21 अप्रैल, 2025। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग द्वितीय ने जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (जेवीवीएनएल) को उपभोक्ता से सर्विस लाइन केबल मंगवाने और भुगतान नहीं करने को सेवा में कमी माना है। आयोग ने निगम पर 30 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। यह आदेश आयोग अध्यक्ष ग्यारसीलाल मीणा और सदस्य हेमलता अग्रवाल की बेंच ने चित्रकूट योजना निवासी नरेन्द्र कुमार गुप्ता की शिकायत पर सुनाया।
क्या है मामला:
28 जुलाई 2021 को शिकायतकर्ता नरेन्द्र गुप्ता के घर की बिजली अचानक गुल हो गई थी। उन्होंने जेवीवीएनएल के कस्टमर केयर पर शिकायत दर्ज कराई। मौके पर पहुंची निगम की फॉल्ट रेक्टिफिकेशन टीम ने बताया कि खंभे से मीटर तक की सर्विस लाइन केबल खराब हो चुकी है और उसे बदलना पड़ेगा। टीम ने यह भी बताया कि निगम के स्टोर में फिलहाल केबल उपलब्ध नहीं है, इसलिए उपभोक्ता को स्वयं बाजार से केबल लानी होगी, जिसका भुगतान निगम बाद में करेगा।
अंधेरा होने की वजह से उपभोक्ता के पास कोई विकल्प नहीं था, ऐसे में उन्होंने 8,260 रुपए खर्च कर केबल खरीदी और लगवाई। लेकिन बाद में निगम ने भुगतान करने से इनकार कर दिया।
जेवीवीएनएल का पक्ष:
सुनवाई के दौरान जेवीवीएनएल ने कहा कि उपभोक्ता ने 16 एमएम मोटाई की केबल खरीदी, जबकि 10 एमएम की केबल पर्याप्त थी। निगम केवल 10 एमएम केबल के मूल्य का भुगतान करने को तैयार था। इसलिए 16 एमएम केबल के भुगतान की मांग अनुचित है।
आयोग का फैसला:
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि फॉल्ट आने पर केबल उपलब्ध कराना निगम की जिम्मेदारी है। यदि उपभोक्ता ने अधिक मोटाई की केबल खरीदी थी, तो उस समय निगम को स्पष्ट मना करना चाहिए था। लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
इस आधार पर आयोग ने निगम को निर्देश दिया कि वह केबल की राशि 8,260 रुपए पर शिकायत की तिथि से भुगतान की तिथि तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाए। साथ ही मानसिक पीड़ा के लिए 30,000 रुपए का मुआवजा भी एक माह के भीतर अदा किया जाए। तय समय में भुगतान नहीं करने की स्थिति में उस पर भी ब्याज देना होगा।




















