NEXT 15 जनवरी, 2026 श्रीडूंगरगढ़। श्रीडूंगरगढ़ में नगरपालिका के डम्पिंग यार्ड को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। कालू रोड स्थित स्थायी डम्पिंग यार्ड में मेडिकल वेस्ट, एक्सपायरी दवाइयों और प्लास्टिक कचरे के कारण बड़ी संख्या में गौवंश की मौत होने का आरोप लगाते हुए दो सामाजिक कार्यकर्ताओं ने न्यायालय में परिवाद पेश किया और मृत गौवंश के पोस्टमार्टम की मांग की। वरिष्ठ अधिवक्ता मोहनलाल सोनी के निर्देशन में एडवोकेट दीपिका करनाणी द्वारा परिवाद पत्र पेश किया गया। परिवाद पर सुनवाई करते हुए एसीजेएम हर्ष कुमार की अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए थानाधिकारी कश्यप सिंह को पोस्टमार्टम करवाने के निर्देश जारी किए।
आपणो गांव श्रीडूंगरगढ़ सेवा समिति से जुड़े शूरवीर मोदी और रामप्रताप सारस्वत ने अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्रीडूंगरगढ़ के समक्ष परिवाद दायर कर पालिकाध्यक्ष, नगरपालिका अधिकारियों, ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी और अन्य कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
खुले डम्पिंग यार्ड में बिखरा मेडिकल वेस्ट
परिवाद के अनुसार 4 जनवरी 2026 को सेवादार जब कालू रोड स्थित डम्पिंग यार्ड पहुंचे तो वहां कोई चारदीवारी, तारबंदी या सुरक्षा व्यवस्था नहीं थी। पूरे परिसर में कचरा, मेडिकल वेस्ट, खून से सनी पट्टियां, मवाद और एक्सपायरी दवाइयां बिखरी हुई थीं। आरोप है कि लगभग 100 से अधिक गौवंश इन खतरनाक पदार्थों को खा रहे थे।
सेवादारों का दावा है कि डम्पिंग यार्ड के अंदर ही 50 से ज्यादा गायों के शव क्षत-विक्षत हालत में पड़े थे, जिन्हें आवारा कुत्ते और गिद्ध नोच रहे थे। दृश्य इतना भयावह था कि प्रथम दृष्टया गायों की मौत मेडिकल वेस्ट और जहरीले पदार्थ खाने से होने की आशंका जताई गई।
सूचना देने के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई
परिवादीगण का कहना है कि घटना की सूचना तुरंत नगरपालिका के कार्यवाहक अधिशासी अधिकारी, सफाई निरीक्षक और ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी को दी गई तथा मृत गौवंश का पोस्टमार्टम करवाने का आग्रह किया गया, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
आरोप है कि सबूत मिटाने की नीयत से मृत पशुओं के शवों पर लोडर मशीन से कचरा डलवा दिया गया, जिससे पोस्टमार्टम और जांच संभव न हो सके।
कोर्ट से पुलिस जांच की मांग
एडवोकेट स्नेहा पारीक ने बताया कि अब परिवादीगण ने न्यायालय से मांग की है कि मामले को गंभीर मानते हुए पुलिस को जांच के आदेश दिए जाएं और अभियुक्तों के खिलाफ पशु क्रूरता निवारण अधिनियम सहित भारतीय न्याय संहिता की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया जाए।
न्यायालय द्वारा पुलिस को पोस्टमार्टम के आदेश दिए जा चुके हैं।





















