
भूमि आवंटन और पट्टों की वैधता को सुनिश्चित करने के लिए राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 में समय-समय पर संशोधन किए जाते रहे हैं। वर्ष 2021 में अधिनियम में एक महत्वपूर्ण संशोधन करते हुए धारा 73(ख) को जोड़ा गया, जिसके तहत गलत तथ्यों, मिथ्या दस्तावेजों या विधि का उल्लंघन करके जारी किए गए पट्टों को रद्द करने का अधिकार नगरपालिका को दिया गया है। यह प्रावधान अनियमित और अवैध पट्टा आवंटन पर अंकुश लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
पट्टा रद्द करने की प्रक्रिया
यदि नगरपालिका को जानकारी मिलती है या लाया जाता है कि किसी पट्टे का निष्पादन गलत तथ्यों, मिथ्या दस्तावेजों, या कानूनी प्रक्रियाओं के उल्लंघन के आधार पर हुआ है, तो वह उस पट्टे को रद्द करने के लिए उचित कार्रवाई कर सकती है।
1. कारण बताओ नोटिस जारी करना
पट्टे को रद्द करने की प्रक्रिया की शुरुआत “कारण बताओ नोटिस” (Show Cause Notice) से होती है।
- इस नोटिस में स्पष्ट रूप से उन आधारों का उल्लेख किया जाता है जिनके चलते पट्टे को रद्द किया जाना प्रस्तावित है।
- पट्टाधारी को अपना पक्ष प्रस्तुत करने के लिए कम से कम सात दिनों का समय दिया जाता है।
- इस अवधि के भीतर पट्टा धारक अपने दस्तावेज या साक्ष्य प्रस्तुत कर सकता है।
2. पट्टे की समीक्षा और निर्णय
यदि पट्टा धारक द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य अपर्याप्त पाए जाते हैं, या यह सिद्ध होता है कि पट्टा अनियमित रूप से जारी किया गया था, तो नगरपालिका को अधिकार है कि वह पट्टे को रद्द कर दे।
3. बेदखली का आदेश
पट्टा निरस्त किए जाने के बाद, नगरपालिका संबंधित व्यक्ति को भूमि से बेदखल करने का आदेश भी जारी कर सकती है।
अपील का अधिकार
यदि किसी व्यक्ति का पट्टा निरस्त किया जाता है, तो उसे राज्य सरकार या उसके द्वारा प्राधिकृत अधिकारी के समक्ष 15 दिन के भीतर अपील करने का अधिकार है। इस प्रावधान के तहत अपील दायर करने से पहले, संबंधित व्यक्ति को यह सुनिश्चित करना होगा कि उसके पास वैध दस्तावेज और पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं।
न्यायालय में चुनौती नहीं
धारा 73(ख) की उपधारा (7) के अनुसार, नगरपालिका द्वारा किए गए निर्णय के खिलाफ सिविल न्यायालय में कोई मुकदमा दायर नहीं किया जा सकता। इस प्रावधान का उद्देश्य प्रशासनिक निर्णयों में बाधा डालने वाली अनावश्यक कानूनी प्रक्रियाओं को रोकना है।
प्रावधान का महत्व
इस संशोधन से नगरपालिकाओं को अधिक अधिकार और शक्तियां प्राप्त हुई हैं, जिससे वे अवैध पट्टों को रोकने में सक्षम हो सकें। यह प्रावधान भूमि आवंटन की प्रक्रिया को पारदर्शी और विधिसम्मत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
निष्कर्ष और NEXT की अपील
नगरपालिका अधिनियम की धारा 73(ख) अवैध पट्टा आवंटन को नियंत्रित करने का एक प्रभावी साधन है। इसके तहत पट्टा धारकों को निष्पक्ष प्रक्रिया के तहत अपना पक्ष रखने का अवसर मिलता है, वहीं नगरपालिका को गलत तरीके से आवंटित भूमि को पुनः सरकारी स्वामित्व में लेने का अधिकार मिलता है। इसलिए, सभी नागरिकों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे किसी भी भूमि का पट्टा प्राप्त करने से पहले उसकी वैधता की जांच करें, ताकि बाद में किसी भी प्रकार की कानूनी कार्रवाई से बचा जा सके।