NEXT 19 मार्च, 2025। केंद्र सरकार वोटर आईडी और आधार को लिंक करने की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी कर रही है। इसे लेकर मंगलवार को चुनाव आयोग और UIDAI के अधिकारियों की बैठक हुई, जिसमें दोनों को जोड़ने पर सहमति बनी। जल्द ही इस पर विशेषज्ञों से राय ली जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट पहले लगा चुका है रोक
2015 में भी चुनाव आयोग ने राष्ट्रीय मतदाता सूची शुद्धिकरण कार्यक्रम (NERPAP) के तहत वोटर कार्ड को आधार से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की थी। इस दौरान आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के करीब 55 लाख लोगों के नाम वोटर डेटाबेस से हट गए थे। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जिसने इस प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी। 2018 में कोर्ट ने फैसला दिया था कि आधार को सिर्फ सरकारी सब्सिडी और कल्याणकारी योजनाओं के लिए अनिवार्य किया जा सकता है।
चुनाव आयोग ने मांगे सुझाव
चुनाव आयोग ने 31 मार्च से पहले निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (ERO), जिला चुनाव अधिकारियों (DEO) और मुख्य चुनाव अधिकारियों (CEO) के साथ बैठक करने का निर्णय लिया है। साथ ही, सभी राष्ट्रीय और राज्य-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों से 30 अप्रैल 2025 तक सुझाव मांगे गए हैं।
राहुल गांधी ने किया विरोध
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि गरीबों को लिंकिंग प्रक्रिया में परेशानी होगी और चुनाव आयोग को सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई भी मतदाता अपने अधिकार से वंचित न हो।
वर्तमान स्थिति
सरकार के अनुसार, आधार-वोटर कार्ड लिंकिंग स्वैच्छिक होगी और इसे अनिवार्य नहीं बनाया जाएगा। जो लोग अपने आधार को मतदाता सूची से लिंक नहीं करेंगे, उनके नाम वोटर लिस्ट से नहीं हटाए जाएंगे।