NEXT 21 फरवरी, 2026 श्रीडूंगरगढ़। विश्व मातृभाषा दिवस के अवसर पर मरुभूमि शोध संस्थान की ओर से विविध कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसी क्रम में ‘राजस्थानी : लोक सूं लाइक तक’ विषय पर आयोजित ग्यान गोठ में वक्ताओं ने सोशल मीडिया में राजस्थानी भाषा की बढ़ती पहुँच और उसकी चुनौतियों पर विचार रखे।

सोशल मीडिया से 15 करोड़ तक पहुँचा राजस्थानी कंटेंट
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजस्थानी आलोचक डॉ. चेतन स्वामी ने कहा कि सोशल मीडिया के माध्यम से आज राजस्थानी कंटेंट लगभग 15 करोड़ लोगों तक पहुँच रहा है, जबकि राजस्थानी भाषा बोलने वालों की संख्या करीब 12 करोड़ मानी जाती है। उन्होंने बताया कि हरियाणा, पंजाब और मालवा क्षेत्र के लोग भी राजस्थानी कंटेंट को रुचि से देख रहे हैं।

उन्होंने मातृभाषा राजस्थानी को विद्यार्थियों तक अधिक से अधिक पहुँचाने, नए पाठक तैयार करने और लेखकीय प्रवृत्तियों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया।
लोकप्रियता है, पर मान्यता की दिशा कमजोर
विषय प्रवर्तन करते हुए युवा कथाकार हरीश बी. शर्मा ने कहा कि यूट्यूब, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर राजस्थानी कंटेंट को व्यापक लोकप्रियता मिल रही है, लेकिन यह राजस्थानी भाषा को राजभाषा का दर्जा दिलाने और मान्यता के एजेंडे को आगे बढ़ाने में अभी तक प्रभावी सिद्ध नहीं हो पाया है।
उन्होंने कहा कि कंटेंट क्रिएटर्स के पास मजबूत स्क्रिप्ट और दीर्घकालिक दृष्टि का अभाव भी एक बड़ी समस्या है।
साहित्यकारों को किया गया सम्मानित
इस अवसर पर साहित्य के क्षेत्र में योगदान के लिए-
- डॉ. तेजसिंह जोधा को महाराणा प्रताप राजस्थानी साहित्य सृजन पुरस्कार
- डॉ. कृष्णा कुमारी को पं. मुखराम सिखवाल स्मृति पुरस्कार
- प्रेम को सूर्यप्रकाश बिस्सा स्मृति सम्मान
- पूर्ण शर्मा को डूंगर कल्याणी स्मृति राजस्थानी बाल साहित्य सम्मान प्रदान किया गया।
काव्य पाठ और विचार अभिव्यक्ति
डॉ. तेजसिंह जोधा ने काव्य पाठ किया, वहीं डॉ. कृष्णा कुमारी, श्रीमती प्रेम और पूर्ण शर्मा ‘पूर्ण’ ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
राजस्थानी लोक साहित्य विश्व को करता है प्रभावित
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार श्याम महर्षि ने कहा कि राजस्थानी लोक साहित्य और लोक संगीत ने पूरे विश्व को प्रभावित किया है। उन्होंने राजस्थानी पुस्तकों को पाठकों तक पहुँचाने के लिए किसी व्यापक अभियान की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।
कार्यक्रम का संचालन रवि पुरोहित साहित्यकार ने किया। आभार ज्ञापन युवा कवयित्री भगवती पारीक “मनु” ने किया।






















