NEXT 9 जनवरी, 2025। क्षेत्र के कोटासर गांव स्थित भोमियाजी मंदिर में चल रही संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन ध्रुव और विदुर चरित्र की कथा सुनाई गई। कथा के दौरान कथावाचक पंडित प्रकाश तिवाड़ी ने धैर्य, भक्ति और प्रेम का महत्त्व बताया।

ध्रुव चरित्र का वर्णन करते हुए पंडित तिवाड़ी ने कहा कि की भक्ति के लिए उम्र बाधा नहीं है। बचपन में भक्ति का संस्कार देना आवश्यक है क्योंकि यह उम्र कच्ची मिट्टी की तरह होती है।
विदुर चरित्र के प्रसंग में उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के प्रेम की व्याख्या की। उन्होंने बताया कि भगवान प्रेम के भूखे होते हैं। विदुर-विदुरानी के सच्चे प्रेम ने भगवान को उनकी कुटिया तक खींच लिया।
कथा में श्रद्धालु बड़ी संख्या में शामिल हुए और भक्ति व प्रेम की शिक्षा लेकर भाव-विभोर हुए।