NEXT 30 दिसंबर 2024। श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र में सोमवती अमावस्या का पर्व श्रद्धा, सेवा और समर्पण का अनुपम उदाहरण बनकर उभरा। धार्मिक मान्यता के अनुसार मलमास की सोमवती अमावस्या को दान-पुण्य और गौसेवा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन किए गए पुण्य कार्य से जीवन में सुख, समृद्धि और शांति प्राप्त होती है। सोमवती अमावस्या पर गौभक्तों और ग्रामीणों ने पूरे उत्साह के साथ धर्म और परोपकार के कार्यों में भाग लिया।
मलमास की सोमवती अमावस्या के पावन अवसर पर श्रीडूंगरगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में दिनभर दान-पुण्य और धार्मिक आयोजनों का सिलसिला चलता रहा। क्षेत्र की गौशालाओं में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए, जहां श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
श्रीडूंगरगढ़ की गोपाल गौशाला में दिनभर दान-पुण्य का कार्य चलता रहा। गौ भक्तों ने विभिन्न प्रकार की सेवाएं कीं। वहीं, बाड़ेला गांव की श्री गिरधर गोपाल गौशाला में सत्संग और हवन का आयोजन किया गया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने लापसी बनाकर गौ माता को अर्पित की।

सेरूणा और जैसलसर गांवों में भी गौसेवा की अनोखी मिसाल देखने को मिली। स्वयंसेवकों ने विशाल कड़ाही में लापसी बनाकर गौवंश को खिलाया। इसी प्रकार, सातलेरा गांव की श्री शिव गौशाला में दान-पुण्य का सिलसिला दिनभर जारी रहा। यहां मुरलीधर तावनियां परिवार और भंवरलाल मेघवाल परिवार ने सवामणी के रूप में लापसी बनाकर गौ माता को खिलाई।
गौशालाओं में ग्रामीणों ने गुड़, खल, चूरी और चारा आदि दान किए। महिलाओं ने भजन-कीर्तन कर गौ माता से आशीर्वाद लिया।