NEXT 27 फरवरी, 2026 श्रीडूंगरगढ़। श्रीडूंगरगढ़ एसीजेएम न्यायालय ने 13 वर्ष पुराने धोखाधड़ी एवं दस्तावेज़ों की कूटरचना के एक मामले में फैसला सुनाते हुए दो आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। निर्णय अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट हर्ष कुमार द्वारा सुनाया गया।
मामले में परिवादी उमराव सिंह पुत्र सूरजभान यादव निवासी लालासर (श्रीडूंगरगढ़) ने वर्ष 2012 में अपने भाई छैलूसिंह और भतीजे अल्पेश पर खेत हड़पने की नीयत से धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया था। परिवाद के अनुसार आरोपियों ने फर्जी दस्तावेज़ और गलत तरीके से वसीयत तैयार कर खेत को अन्य आरोपी रामेश्वर को बेच दिया।
अधिवक्ता राधेश्याम दर्जी ने बताया कि परिवाद पर पुलिस थाना श्रीडूंगरगढ़ में मामला दर्ज कर जांच की गई। जांच के बाद पुलिस ने आरोप प्रमाणित मानते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468 एवं 471 के तहत न्यायालय में चालान पेश किया। मामला करीब 13 वर्षों तक न्यायालय में विचाराधीन रहा। इस दौरान आरोपी रामेश्वर की मृत्यु हो गई।
एडवोकेट गोपाल पारीक ने बताया कि विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 11 गवाहों के बयान और कई दस्तावेज़ न्यायालय में प्रस्तुत किए गए, लेकिन न्यायालय ने पाया कि अभियोजन आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में असफल रहा। इसके चलते न्यायालय ने शेष दोनों आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।
आरोपियों की ओर से अधिवक्ता राधेश्याम दर्जी एवं अधिवक्ता गोपाल पारीक ने पैरवी की।




















