NEXT 23 मार्च, 2025। समीपवर्ती गांव जैतासर स्थित सती दादी मंदिर में 25 मार्च, मंगलवार को विशाल भजन संध्या का आयोजन किया जाएगा। आयोजकों के अनुसार, इस अवसर पर सती दादी को 51 किलो प्रसाद का भोग अर्पित किया जाएगा तथा रात्रि में भव्य जागरण होगा।

कार्यक्रम में भक्ति संध्या की विशेष प्रस्तुति नागौर के निंबाराम मांजू देंगे। आयोजन समिति ने क्षेत्र के श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में भाग लेकर धार्मिक कार्यक्रम को सफल बनाने की अपील की है।
जैतासर की सती दादी: इतिहास में आस्था और त्याग
जैतासर गांव में स्थित सती दादी माँ का इतिहास श्रद्धा और बलिदान से जुड़ा हुआ है। जनश्रुति के अनुसार, सती दादी माँ का नाम लाछा था, जिनका विवाह साईदास गोदारा से हुआ था। उनके पुत्र का नाम बरताराम और पौत्र किशनाराम था।

ऐतिहासिक संदर्भों के अनुसार, सती दादी के पति और पुत्र की अकाल मृत्यु हो गई थी। इसके बाद, जब उनका पौत्र किशनाराम तालाब में डूबकर मृत्यु को प्राप्त हो गया, तो लाछा ने अपने पौत्र को गोद में बैठाकर सूर्य भगवान से अग्नि ली और चैत्र बद्री बारस (संवत 1664) के दिन जैतासर (बीकानेर) में सती हो गईं।
इस घटना के बाद गोदारा वंश ने उन्हें अपनी कुलदेवी के रूप में पूजना प्रारंभ किया, जो कालांतर में संपूर्ण समाज में श्रद्धा और भक्ति का केंद्र बन गईं। आज भी जैतासर स्थित सती दादी माँ का मंदिर लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख स्थल है, जहां हर वर्ष भव्य धार्मिक आयोजन किए जाते हैं।
मस्सों का होता है सातवीं फेरी में सफाया
सती दादी की आसपास सहित समीपवर्ती कस्बों में बहुत मान्यता है। किसी भी व्यक्ति के शरीर पर कहीं अगर मस्से हो जाये तो दादी की ओट लेने और सात फेरी श्रद्धापूर्वक देने से मस्से झड़ जाते हैं। ऐसे कई प्रमाण देखने को मिलते हैं जब श्रद्धालुओं ने बताया कि उनके मस्से दवाइयों से भी ठीक नहीं हो रहे थे और उन्होंने जब श्रद्धापूर्वक सती दादी के सात फेरी लगाई और बताशे, झाड़ू और नमक चढ़ाया तो सातवें दिन चामत्कारिक रूप से मस्से गायब हो गए। हैरानी की बात यह रही कि उनके निशान भी नहीं रहे।