NEXT 20 अगस्त, 2026 श्रीडूंगरगढ़। सेरुणा थाना क्षेत्र में ट्रेलर से 8 क्विंटल 38 किलो 950 ग्राम डोडा पोस्त छिलका व चूरा बरामद होने के मामले में आरोपी 21 वर्षीय सुरेंद्र कुमार को कोर्ट से राहत नहीं मिली। अपर सेशन न्यायाधीश श्रीडूंगरगढ़ कृष्णकांत ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ बरामद होने और बिना अनुज्ञा पत्र के उसका परिवहन किए जाने को गंभीर माना।
मामला 6 दिसंबर 2025 का है। पुलिस को तड़के करीब 3:35 बजे बीकानेर कंट्रोल रूम से सूचना मिली थी कि एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स एक ट्रेलर का पीछा कर रही है। सूचना के बाद तात्कालीन सेरुणा थानाधिकारी संध्या ने थाना भवन के सामने नाकाबंदी की। करीब 4:30 बजे श्रीडूंगरगढ़ की तरफ से आ रहे ट्रेलर आरजे 19 जीजे 1790 को रुकवाया गया। पुलिस के अनुसार चालक ट्रेलर से उतरकर भागने लगा, लेकिन पुलिस ने उसे पकड़ लिया। पूछताछ में उसकी पहचान सुरेंद्र कुमार पुत्र भंवराराम, निवासी मुलकी ढाणी, थाना मंडली, जिला बालोतरा के रूप में हुई।
46 प्लास्टिक कट्टों में भरा था मादक पदार्थ
पुलिस ने ट्रेलर की तलाशी ली तो 46 प्लास्टिक कट्टों में कुल 8 क्विंटल 38 किलो 950 ग्राम डोडा पोस्त छिलका व चूरा मिला। आरोपी से मादक पदार्थ रखने और ट्रेलर से परिवहन करने का कोई अनुज्ञा पत्र नहीं मिला। इसके बाद पुलिस ने मादक पदार्थ जब्त कर सुरेंद्र कुमार को गिरफ्तार कर लिया।
सेरुणा थाने में एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई की गई। अनुसंधान पूरा होने के बाद आरोपी सहित अन्य के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र पेश किया गया।
बचाव पक्ष बोला- झूठा फंसाया, परिवार का अकेला कमाने वाला
जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान आरोपी के अधिवक्ता ने उसे झूठा फंसाने का तर्क दिया। बचाव पक्ष ने कहा कि आरोपी का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और वह परिवार का अकेला कमाने वाला सदस्य है। वहीं अभियोजन पक्ष अपर लोक अभियोजक सोहन नाथ सिद्ध ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ ट्रेलर से परिवहन करते हुए पकड़ा गया था और उसके पास इसका कोई वैध अनुज्ञा पत्र नहीं था।
कोर्ट ने माना- मात्रा बड़ी, इसलिए जमानत का आधार नहीं
अदालत ने दोनों पक्षों के तर्क और केस रिकॉर्ड का अवलोकन किया। कोर्ट ने माना कि आरोपी को 46 कट्टों में बड़ी मात्रा में डोडा पोस्त का परिवहन करते हुए गिरफ्तार किया गया है। इतनी मात्रा को देखते हुए इसके व्यावसायिक उद्देश्य से ले जाए जाने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
अदालत ने कहा कि बिना अनुज्ञा पत्र के मादक पदार्थ को अपने कब्जे में रखना और उसका परिवहन करना अपराध की गंभीरता को बढ़ाता है। ऐसे में आरोपी को जमानत का लाभ दिया जाना न्यायोचित नहीं है।
अपर सेशन न्यायाधीश कृष्णकांत ने सुरेंद्र कुमार की पेश जमानत याचिका खारिज कर दी।






















