NEXT 22 अगस्त, 2026 श्रीडूंगरगढ़। मृतका के नाम की जमीन हड़पने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार कर सौदा करने के मामले में अपर सेशन न्यायाधीश श्रीडूंगरगढ़ ने आरोपी ओमप्रकाश पुत्र रामूराम नाई निवासी कालूबास की जमानत याचिका खारिज कर दी। एडीजे कृष्णकांत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद केस डायरी का अवलोकन किया और अपराध की गंभीरता को देखते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया।
1995 में हो चुकी थी मां की मौत, 2025 में जमाबंदी देख खुला राज: परिवादिया संजू देवी ने बताया कि उसकी मां लक्ष्मीदेवी लूणिया के नाम जैतासर गांव की रोही में खसरा नंबर 474 की कृषि भूमि थी। लक्ष्मीदेवी की 21 जुलाई 1995 को नेपाल में मृत्यु हो चुकी थी। 2 अक्टूबर 2025 को ऑनलाइन जमाबंदी निकलवाने पर परिवादिया को पता चला कि जमीन पर मुकेश स्वामी, अंकित धामा और मनोज प्रजापत खातेदार के रूप में दर्ज हैं। यह देखकर वह हैरान रह गई।
मृतका के नाम से फर्जी मुख्तयारनामा और दस्तावेज बनाने का आरोप: परिवादिया के अनुसार 11 फरवरी 2026 को श्रीडूंगरगढ़ आने पर उसे पता चला कि अनवर अली, अनुराम, नरेंद्र डेलू, मुकेश स्वामी, अंकित धामा और मनोज प्रजापत सहित अन्य लोगों ने कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर विक्रय पत्रों का पंजीयन करवाया है। इसके बाद उसने मामला दर्ज करवाया।
जांच में सामने आया कि लक्ष्मीदेवी के नाम का कथित फर्जी मुख्तयारनामा तैयार किया गया। आरोप है कि मृतका के फर्जी आधार कार्ड और पैन कार्ड बनाए गए तथा उसकी जगह विमला देवी उर्फ शांति को खड़ा कर जमीन बेच दी गई।
जमीन दलाली से जुड़े होने और जानकारी होने का आरोप: अनुसंधान में आरोपी ओमप्रकाश नाई और उसके भाई विजय नाई के जमीन की दलाली करने की बात सामने आई। पुलिस के अनुसार ओमप्रकाश ने मामले के संबंध में सम्पतदास साध और राणु प्रकाश पंचारिया को जानकारी दी थी। जांच में राणु प्रकाश, रमेश पंचारिया, विजय नाई और सम्पतदास साध को मामले के प्रमुख सूत्रधार बताया गया है।
अभियोजन ने कहा- गंभीर अपराध, जमानत देना कानून व्यवस्था को आघात: आरोपी के अधिवक्ता ने जमानत के पक्ष में तर्क देते हुए कहा कि ओमप्रकाश का इस मामले में कोई रोल नहीं है। वहीं अपर लोक अभियोजक सोहन नाथ सिद्ध ने जमानत का विरोध करते हुए अपराध को गंभीर बताया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और केस डायरी देखने के बाद अदालत ने ओमप्रकाश नाई की जमानत याचिका अस्वीकार कर दी।





















