NEXT 7 अक्टूबर, 2026 श्रीडूंगरगढ़। श्रीडूंगरगढ़ की ग्राम पंचायत बींझासर में वर्ष 2017 में हुई पंचायत सहायक भर्ती प्रक्रिया को लेकर दो अभ्यर्थियों ने गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। प्रार्थी झूमरमल ओड और श्याम सुन्दर पुरोहित ने जिला कलेक्टर को परिवाद देकर भर्ती प्रक्रिया की बिंदुवार जांच कराने और दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करने की मांग की थी और अब जांच एसडीएम श्रीडूंगरगढ़ द्वारा की जाएगी।
परिवाद में बताया गया है कि 4 अक्टूबर 2017 को राज्य सरकार के निर्धारित 100 अंकों के मापदंड के अनुसार एसडीएमसी बींझासर ने योग्यता और अनुभव के आधार पर वरीयता सूची तैयार की थी। इसमें झूमरमल ओड ने 61.25 अंक के साथ प्रथम और श्याम सुन्दर पुरोहित ने 60.65 अंक के साथ द्वितीय स्थान प्राप्त किया था। तत्कालीन बीईईओ श्रीडूंगरगढ़ ने भी सूची का मिलान कर हस्ताक्षर व सील के साथ अभिशंसा की थी।
आरोप- मूल सूची जिला परिषद को नहीं भेजी:
परिवादियों का आरोप है कि चयन सूची को अंतिम अनुमोदन के लिए जिला परिषद के सीईओ के पास भेजा जाना था, लेकिन बीईईओ कार्यालय स्तर पर मूल चयन सूची को आगे नहीं भेजा गया। उन्होंने इस मामले में संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका की जांच की मांग की है।
2018 में नई शर्त जोड़ने का आरोप:
परिवाद में कहा गया है कि 3 अप्रैल 2018 को हुई बैठक में एसडीएमसी बींझासर ने मूल भर्ती नियमों से अलग केवल बींझासर पंचायत का स्थानीय निवासी होने की शर्त जोड़ दी। परिवादियों का दावा है कि इस आधार पर उनसे कम अंक और कम अनुभव वाले अभ्यर्थियों का चयन किया गया।
दो विभागीय आदेशों में विरोधाभास का मुद्दा उठाया:
परिवादियों ने जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक शिक्षा बीकानेर के जारी स्पीकिंग ऑर्डर का भी हवाला दिया है। उनका कहना है कि दोनों दस्तावेजों में 2017 और 2018 की चयन प्रक्रिया को लेकर परस्पर विरोधी तथ्य दर्ज हैं। उन्होंने दोनों दस्तावेजों की मूल पत्रावलियों की जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।
2017 से लगातार परिवेदनाएं देने का दावा:
दोनों अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितता के बाद से ही वे लगातार जिला शिक्षा अधिकारी, सीईओ जिला परिषद और जिला कलेक्टर को परिवेदनाएं देते आ रहे हैं। अब उन्होंने जिला सतर्कता समिति के आदेश के तहत मामले की गहन जांच की मांग की है।
पद रिक्त नहीं होने पर अतिरिक्त पद सृजन की मांग:
परिवाद में कहा गया है कि यदि जांच में यह साबित होता है कि दोनों अभ्यर्थी वर्ष 2017 की प्रक्रिया में नियमानुसार चयनित थे और प्रशासनिक गलती के कारण नियुक्ति से वंचित हुए, तो केवल पद रिक्त नहीं होने का आधार उनके अधिकारों को खत्म करने के लिए पर्याप्त नहीं होना चाहिए। उन्होंने सुपरन्यूमरेरी यानी विशेष/अतिरिक्त पद सृजित कर नियुक्ति देने की विधिक अनुशंसा की मांग की है।



















