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चाणक्य पर राजस्थानी का पहला उपन्यास ‘चोटी रै गांठ’ लोकार्पित, साहित्यकार बोले- इतिहास से संवाद का सशक्त माध्यम

By Next Team Writer

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NEXT 12 जुलाई, 2026 श्रीडूंगरगढ़। मरूभूमि शोध संस्थान के तत्वावधान में रविवार को राष्ट्र भाषा हिंदी प्रचार समिति के संस्कृति भवन में राजस्थानी उपन्यास ‘चोटी रै गांठ’ का लोकार्पण एवं पुस्तक चर्चा समारोह आयोजित हुआ। साहित्यकारों ने इसे चाणक्य के व्यक्तित्व और विचारों को राजस्थानी भाषा में प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने वाली महत्वपूर्ण कृति बताते हुए ऐतिहासिक विमर्श की दृष्टि से भी उल्लेखनीय बताया।

मुख्य अतिथि मालचंद तिवाड़ी ने कहा कि ऐतिहासिक उपन्यास का सृजन इतिहास और कल्पना के संतुलन की सबसे बड़ी परीक्षा है। प्रमाणित ऐतिहासिक तथ्यों की विश्वसनीयता बनाए रखते हुए कथा को रोचक बनाना ही लेखक की वास्तविक सफलता है। इसी संतुलन से कालजयी साहित्य का जन्म होता है।

कार्यक्रम की शुरुआत में साहित्यकार रवि पुरोहित ने कहा कि चाणक्य का जीवन केवल सत्ता प्राप्ति का इतिहास नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण, नेतृत्व, शिक्षा, अनुशासन और दूरदृष्टि का प्रेरक उदाहरण है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में ऐसे ऐतिहासिक उपन्यास समाज को विवेकपूर्ण सोच की दिशा देते हैं।

मुख्य वक्ता डॉ. चेतन स्वामी ने कहा कि “ऐतिहासिक उपन्यास अतीत का पुनर्लेखन नहीं, बल्कि उसके साथ सृजनात्मक संवाद है।” उन्होंने कहा कि लेखक का दायित्व इतिहास की आत्मा को सुरक्षित रखते हुए उसे वर्तमान की चेतना से जोड़ना होता है।

साहित्यकार हरीश बी. शर्मा ने पत्र वाचन में कहा कि ‘चोटी रै गांठ’ चाणक्य पर लिखा राजस्थानी का पहला उपन्यास है। उन्होंने इसे विमर्श की दृष्टि से ब्राह्मण विमर्श का पहला भारतीय उपन्यास बताते हुए कहा कि इसमें अर्थशास्त्र की नीतियों का प्रभावी समावेश किया गया है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि यह कृति एमए राजस्थानी के पाठ्यक्रम में शामिल होती है तो भाषा, व्याकरण और लोकोक्तियों के अध्ययन के लिए अलग पुस्तक की आवश्यकता नहीं रहेगी।

विशिष्ट अतिथि भाषाविद् डॉ. मदन सैनी ने कहा कि यह उपन्यास कई नए विमर्शों को जन्म देने की क्षमता रखता है। वहीं बी.एल. भादानी ने ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित ऐसी कृतियों की गंभीर समीक्षा की आवश्यकता बताई। अध्यक्षीय उद्बोधन में साहित्यकार श्याम महर्षि ने लेखक सत्यदीप की सृजनात्मक ऊर्जा और सामाजिक सरोकारों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता की सराहना करते हुए उन्हें समाज के प्रति सजग रहने का संदेश दिया।

भगवती पारीक के संयोजन में आयोजित समारोह में श्रीभगवान सैनी, सीमा भोजक और महेश जोशी ने पुस्तक पर अपनी पाठकीय टिप्पणियां प्रस्तुत कीं। कार्यक्रम में बजंरग सेवग, गजानंद सेवग , शिक्षाविद राजीव श्रीवास्तव, मनोज पारख, एडवोकेट रणवीर खीची, रामचन्द्र राठी, महावीर माली सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार, शिक्षाविद् एवं साहित्यप्रेमी मौजूद रहे।

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