महेन्द्र कुमार हत्याकांड में सात गवाहों के बयान हो चुके दर्ज, गवाहों को प्रभावित करने की आशंका भी जताई गई
NEXT 11 जुलाई, 2026 श्रीडूंगरगढ़। हत्या के चर्चित मामले में अपर सेशन न्यायालय ने आरोपी को तीसरी बार भी जमानत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने माना कि पहले दो जमानत आवेदन खारिज होने के बाद भी मामले की परिस्थितियों में कोई ऐसा बदलाव नहीं आया है, जिससे आरोपी को राहत दी जा सके। न्यायालय ने यह भी माना कि मामले में अभियोजन के सात गवाहों के बयान दर्ज हो चुके हैं और विचारण अभी जारी है।
अपर सेशन न्यायाधीश कृष्ण कान्त ने तेजरासर निवासी अशोक पुत्र शिवरतन की ओर से दायर तीसरी जमानत याचिका को खारिज करते हुए कहा कि उसके खिलाफ हत्या और आपराधिक षड्यंत्र जैसे गंभीर आरोप हैं। अपर लोक अभियोजक सोहन नाथ सिद्ध के अनुसार आरोपी ने सह-आरोपियों के साथ मिलकर महेन्द्र कुमार की हत्या की साजिश रची और वारदात को अंजाम दिया। मामले में मृतक की नाबालिग पत्नी के साथ षड्यंत्र रचने का आरोप भी शामिल है।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि आरोपी को घटनास्थल से जोड़ने वाला कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं है। वह लंबे समय से न्यायिक अभिरक्षा में है, परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य है और मुकदमे के निस्तारण में समय लग सकता है। दूसरी ओर अपर लोक अभियोजक सोहन नाथ सिद्ध ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी पर गंभीर अपराध का आरोप है, पहले भी दो बार उसकी जमानत याचिका खारिज हो चुकी है और रिहा होने पर गवाहों को प्रभावित या डराने-धमकाने की आशंका बनी रहेगी।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि दूसरी जमानत याचिका खारिज होने के बाद केवल तीन और गवाहों के बयान हुए हैं तथा मामले की परिस्थितियों में कोई महत्वपूर्ण परिवर्तन नहीं हुआ है। ऐसे में गुण-दोष पर टिप्पणी किए बिना आरोपी को जमानत देना न्यायोचित नहीं होगा। इन आधारों पर अदालत ने अशोक की तीसरी जमानत याचिका खारिज कर दी।




















