NEXT 16 सितम्बर, 2026 श्रीडूंगरगढ़। संवत्सरी पर्व पर बुधवार सुबह साध्वी सेवा केंद्र मालू भवन में जैन समाज की ओर से सामूहिक खमतखामणा कार्यक्रम आयोजित हुआ। साध्वी लक्ष्यप्रभा के सान्निध्य में सूर्योदय के साथ हुए क्षमापना अनुष्ठान में श्रावक-श्राविकाओं ने विगत में हुई भूलों के लिए क्षमा मांगी और परस्पर एक-दूसरे को माफ किया। कार्यक्रम में उपवास एवं पौषध करने वाले धर्मावलंबियों सहित विभिन्न सभा-संस्थाओं के पदाधिकारी मौजूद रहे। गौरतलब है कि मंगलवार को सभी जैन धर्मावलंबियों के द्वारा अनाहार तपस्या की गई और पूरे दिन आध्यात्मिक व्याख्यान, नाम जप किया गया।

साध्वी लक्ष्यप्रभा बोलीं- मतभेद नहीं, मनभेद भी नहीं रखें
साध्वी लक्ष्यप्रभा ने कहा कि संवत्सरी आत्मावलोकन और आत्मशुद्धि का पर्व है। हमें अपनी गत भूलों का खाता साफ कर आत्मा को निर्मल बनाना चाहिए। जीवन में न मतभेद रखना है और न मनभेद। खमतखामणा का अवसर हमें उज्ज्वल और सरल हृदय बनने की प्रेरणा देता है। साध्वी ने शैयात्तर लाभार्थी मालू परिवार से खमतखामणा किया और मदनलाल मालू का नामोल्लेख किया।
इस दौरान श्रद्धालुओं ने आचार्य महाश्रमण सहित सभी साधु-साध्वियों और प्राणीमात्र से क्षमायाचना की। इसके बाद श्रावक-श्राविकाओं ने परस्पर खमतखामणा कर मन में किसी के प्रति रहे गिले-शिकवे दूर किए।
विभिन्न संस्थाओं ने सामूहिक रूप से की क्षमायाचना
सभा की ओर से मंत्री प्रदीप पुगलिया, अणुव्रत समिति की ओर से विजयराज सेठिया, महिला मंडल की ओर से झिणकार देवी बोथरा, तेरापंथ युवक परिषद की ओर से सहमंत्री सुमित बरड़िया, महिला मंडल उपाध्यक्ष मधु झाबक, श्री ओसवाल पंचायत के मंत्री कांति पुगलिया, किशोर मंडल से अजय बोथरा और कन्या मंडल संयोजिका प्रेक्षा पुगलिया सहित विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारियों ने सामूहिक खमतखामणा कर क्षमायाचना की।
तपस्वियों के लिए सामूहिक पारणा, चारित्र आत्माओं को सुपात्र दान
श्री ओसवाल पंचायत की ओर से उपवास करने वाले तपस्वियों और समाजजनों के लिए सामूहिक पारणा कराया गया। चारित्र आत्माओं को सुपात्र दान का लाभ भी दिलाया गया। अध्यक्ष विनोद भादानी और मंत्री कांति कुमार पुगलिया के नेतृत्व में पंचायत की पूरी टीम व्यवस्थाओं में सक्रिय रही।
100 से अधिक पौषध, सैकड़ों ने रखे उपवास
सभा मंत्री प्रदीप पुगलिया ने बताया कि संवत्सरी पर्व पर बड़ी संख्या में धर्माराधना हुई। समाज में 100 से अधिक अष्टप्रहरी, छह प्रहरी और चार प्रहरी पौषध हुए, जबकि सैकड़ों धर्मावलंबियों ने उपवास रखकर तपस्या की।

































