श्रीडूंगरगढ़ में करीब एक साल से अधिशासी अधिकारी का पद खाली, तहसीलदार के पास दोनों जिम्मेदारियां; जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र से लेकर सफाई और निर्माण कार्य प्रभावित
NEXT 23 जून, 2026 श्रीडूंगरगढ़। श्रीडूंगरगढ़ नगरपालिका में अधिशासी अधिकारी (ईओ) का पद लंबे समय से रिक्त होने और तहसीलदार को ही अतिरिक्त कार्यभार सौंपे जाने के मामले को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) में शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि एक ही अधिकारी के पास तहसीलदार और अधिशासी अधिकारी दोनों पदों की जिम्मेदारी होने से आमजन को लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनके मूल अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।
श्रीडूंगरगढ़ के सामाजिक कार्यकर्ता शूरवीर मोदी ने बताया कि करीब एक वर्ष से नगरपालिका में नियमित अधिशासी अधिकारी की नियुक्ति नहीं हुई है। वर्तमान में तहसीलदार श्रीवर्धन शर्मा ही नगरपालिका के अधिशासी अधिकारी का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे हैं। इसके कारण नगरपालिका से जुड़े कई जरूरी कार्य समय पर नहीं हो पा रहे हैं।
जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र से लेकर सफाई व्यवस्था तक प्रभावित होने का आरोप
शिकायत के अनुसार जन्म-मृत्यु एवं विवाह पंजीयन, भवन निर्माण स्वीकृति, कॉलोनियों के विकास, सड़क निर्माण, सफाई व्यवस्था, स्ट्रीट लाइट रखरखाव, मृत पशुओं के निस्तारण, अग्निशमन सेवाओं तथा जलभराव जैसी समस्याओं के समाधान में देरी हो रही है। लोगों को तहसील और नगरपालिका कार्यालयों के बीच बार-बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
शिकायतकर्ता का कहना है कि अधिकारी की विभिन्न बैठकों, वीडियो कॉन्फ्रेंस, न्यायालयीन कार्यवाहियों और राजस्व संबंधी दायित्वों के कारण नगरपालिका के कार्य प्रभावित होते हैं। इससे आम नागरिकों का समय और पैसा दोनों खर्च हो रहे हैं।
मानवाधिकार आयोग से स्वतंत्र जांच की मांग
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को भेजी गई शिकायत में मांग की गई है कि किसी स्वतंत्र एजेंसी या राज्य से बाहर की टीम द्वारा स्थिति का सर्वे और जांच करवाई जाए। साथ ही यह भी पता लगाया जाए कि अधिशासी अधिकारी के पद पर नियमित नियुक्ति में देरी क्यों हो रही है।
सरकारी संसाधनों के उपयोग की भी जांच की मांग
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि अतिरिक्त कार्यभार के दौरान दोनों पदों से जुड़े सरकारी वाहनों और अन्य संसाधनों का उपयोग हुआ है। ऐसे में सरकारी धन और संसाधनों के उपयोग की भी निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की गई है। यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने की भी मांग उठाई गई है।
पहले भी प्रशासन को दे चुके हैं ज्ञापन
शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि इस मुद्दे को लेकर जिला प्रशासन और राज्य सरकार को कई बार लिखित रूप से अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसी कारण मामले को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के समक्ष उठाया गया है।



















