एसजेवीएन की 1000 मेगावाट और एनएचपीसी की 300 मेगावाट परियोजना का करेंगे लोकार्पण, 4645 करोड़ की ट्रांसमिशन परियोजनाओं को भी मिलेगी मंजूरी
NEXT 3 जुलाई, 2026 श्रीडूंगरगढ़। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को बालोतरा के पचपदरा में आयोजित राजस्थान रिफाइनरी के लोकार्पण समारोह के दौरान बीकानेर को हरित ऊर्जा के क्षेत्र में बड़ी सौगात देंगे। प्रधानमंत्री जिले की 1300 मेगावाट क्षमता की दो सौर ऊर्जा परियोजनाओं का लोकार्पण करेंगे। इनमें एसजेवीएन की 1000 मेगावाट तथा एनएचपीसी की 300 मेगावाट क्षमता की सौर ऊर्जा परियोजना शामिल है। इसके साथ ही राजस्थान रिन्यूएबल एनर्जी ज़ोन (आरईजेड) से बिजली निकासी के लिए ट्रांसमिशन नेटवर्क से जुड़ी दो बड़ी परियोजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास भी किया जाएगा।
एसजेवीएन की 1000 मेगावाट क्षमता की परियोजना करीब 5492 करोड़ रुपए की लागत से बीकानेर में 5000 एकड़ भूमि पर विकसित की गई है। इसे घरेलू आवश्यकता श्रेणी में देश की सबसे बड़ी सिंगल ईपीसी सौर परियोजना माना जा रहा है। परियोजना पहले वर्ष में 2454 मिलियन यूनिट से अधिक बिजली का उत्पादन करेगी। इससे राजस्थान को 500 मेगावाट, उत्तराखंड को 200 मेगावाट तथा जम्मू-कश्मीर को 300 मेगावाट बिजली मिलेगी। अनुमान है कि अगले 25 वर्षों में इस परियोजना से 2.79 अरब किलोग्राम कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी।
परियोजना में ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देते हुए 24.22 लाख स्वदेशी सोलर मॉड्यूल और 175 करोड़ स्वदेशी सोलर सेल लगाए गए हैं। निर्माण के दौरान 2000 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार मिला है।
इसी कार्यक्रम में प्रधानमंत्री बीकानेर के करणीसर स्थित 300 मेगावाट सौर ऊर्जा संयंत्र का भी लोकार्पण करेंगे। एनएचपीसी की इस परियोजना में करीब 7.75 लाख स्वदेश निर्मित सोलर पीवी सेल एवं मॉड्यूल लगाए गए हैं। संयंत्र से हर वर्ष लगभग 75 करोड़ यूनिट स्वच्छ बिजली का उत्पादन होगा और करीब 6.4 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम होगा। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
4645 करोड़ की ट्रांसमिशन परियोजनाओं को भी मिलेगी रफ्तार
प्रधानमंत्री 1910 करोड़ रुपए की लागत से तैयार राजस्थान आरईजेड फेज-3 भाग-एच ट्रांसमिशन लाइन का उद्घाटन करेंगे। वहीं 2735 करोड़ रुपए की लागत वाली आरईजेड फेज-4 भाग-एफ परियोजना का शिलान्यास भी करेंगे। जून 2027 तक पूरी होने वाली इस परियोजना में 530 सर्किट किलोमीटर लंबी ट्रांसमिशन लाइन और बाड़मेर-1 में 5500 एमवीए क्षमता का सब-स्टेशन बनाया जाएगा। इससे राजस्थान में नवीकरणीय ऊर्जा की निकासी और बिजली आपूर्ति व्यवस्था और मजबूत होगी।



















