पुलिस की प्रभावी पैरवी और अभियोजन की मजबूत दलीलों पर कोर्ट ने लगातार तीन जमानत याचिकाएं कीं खारिज
NEXT 10 जुलाई, 2026 श्रीडूंगरगढ़। क्षेत्र में मादक पदार्थों की तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस की सतर्क कार्रवाई और अदालत में अभियोजन पक्ष की प्रभावी पैरवी का असर लगातार दिखाई दे रहा है। श्रीडूंगरगढ़ व सेरुणा पुलिस की कार्रवाई तथा अपर लोक अभियोजक सोहन नाथ सिद्ध की मजबूत दलीलों को महत्व देते हुए अपर सेशन न्यायाधीश कृष्णकांत की अदालत ने एनडीपीएस एक्ट के तीन अलग-अलग मामलों में आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। अदालत ने स्पष्ट किया कि नशे से जुड़े गंभीर मामलों में उपलब्ध साक्ष्यों और अपराध की गंभीरता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
838 किलो डोडा पोस्त मामले में एस्कॉर्ट करने वाले आरोपी को नहीं मिली जमानत
6 दिसंबर 2025 को सेरुणा पुलिस ने एक ट्रेलर से 838 किलो 950 ग्राम डोडा पोस्त बरामद कर चालक सहित अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इस मामले में बाड़मेर जिले के तेतरवालों की ढाणी, कपूरड़ी निवासी लूणाराम पुत्र सांवलराम ने जमानत की गुहार लगाई। बचाव पक्ष ने दलील दी कि आरोपी ट्रेलर में सवार नहीं था और उसके कब्जे से कोई मादक पदार्थ बरामद नहीं हुआ। वहीं अपर लोक अभियोजक सोहन नाथ सिद्ध ने अदालत को बताया कि आरोपी अपनी ब्रेजा कार से ट्रेलर को एस्कॉर्ट कर रहा था तथा रास्ते में ट्रेलर के लिए डिजिटल भुगतान भी उसी ने कराया था। अदालत ने साक्ष्यों और आरोपी के पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड का अवलोकन करते हुए उसे आदतन अपराधी मानकर जमानत याचिका खारिज कर दी।
7.03 ग्राम एमडीएमए बरामदगी: झूठा फंसाने की दलील नहीं आई काम
दूसरे मामले में 2 जुलाई 2026 को श्रीडूंगरगढ़ पुलिस ने एनएच-11 स्थित हरियाणा होटल एंड रेस्टोरेंट के पास संदिग्ध बाइक सवार प्रवीण पुत्र रामगर निवासी लखासर के कब्जे से 7.03 ग्राम एमडीएमए बरामद कर गिरफ्तार किया था। बचाव पक्ष ने आरोपी को झूठा फंसाने की बात कही, लेकिन अभियोजन ने मामले को गंभीर बताते हुए जमानत का विरोध किया। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और केस डायरी का अवलोकन करने के बाद प्रवीण की जमानत याचिका भी खारिज कर दी।
261 ग्राम अफीम बरामदगी: सह-आरोपियों को राहत नहीं मिली तो मनोज की याचिका भी खारिज
तीसरे मामले में 19 मई 2026 को सेरुणा पुलिस ने सूडसर चौकी पर नाकाबंदी के दौरान एक फॉर्च्यूनर वाहन के डैशबोर्ड से 261 ग्राम अफीम बरामद कर मनोज पुत्र मालाराम निवासी कोटासर सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था। बचाव पक्ष ने झूठा फंसाने का तर्क दिया, जबकि अपर लोक अभियोजक सोहन नाथ सिद्ध ने इसे गंभीर अपराध बताते हुए विरोध किया। अदालत ने केस डायरी, उपलब्ध साक्ष्यों और इस तथ्य को ध्यान में रखा कि सह-आरोपी केशराराम व राकेश की जमानत पहले ही खारिज हो चुकी है। इसके बाद मनोज की जमानत याचिका भी अस्वीकार कर दी।
तीनों मामलों के फैसलों ने यह संदेश दिया है कि नशे के कारोबार के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई, अभियोजन की सशक्त पैरवी और न्यायालय की सख्ती मिलकर मादक पदार्थों की तस्करी पर प्रभावी अंकुश लगाने की दिशा में काम कर रही है।




















