श्रीडूंगरगढ़। आदर्श शिक्षण संस्थान, बीकानेर के तत्वावधान में आदर्श विद्या मंदिर, श्रीडूंगरगढ़ में आयोजित चार दिवसीय जिला आचार्य सम्मेलन-2026 के वंदना सत्र में ज्ञानार्जन, शिक्षा के बदलते स्वरूप और राष्ट्रीय चेतना जैसे विषयों पर गहन मंथन हुआ। सम्मेलन में जिलेभर से आए 277 आचार्य, 31 सेवाकर्मी और 22 वाहन चालक प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।

वंदना सत्र के मुख्य वक्ता जोधपुर प्रांत के प्रांत सचिव गंगाविष्णु बिश्नोई ने ‘ज्ञानार्जन के साधन’ विषय पर कहा कि केवल सूचनाएं ही ज्ञान नहीं होतीं, बल्कि आत्मा में निहित शक्तियों का प्रकटीकरण ही वास्तविक ज्ञान है। उन्होंने बाल विकास की विभिन्न अवस्थाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि शांत और एकाग्र मन ही व्यक्ति के बौद्धिक एवं आत्मिक विकास का आधार बनता है।
मुख्य अतिथि जिला शिक्षा अधिकारी रामगोपाल शर्मा ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक तकनीक के दौर में भी शिक्षा का मूल उद्देश्य बच्चों में व्यावहारिक ज्ञान, संस्कार और जीवन-मूल्यों का विकास करना है। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रबंध समिति के संरक्षक आशाराम पारीक मौजूद रहे। जिला सचिव मूलचंद सारस्वत ने अतिथियों का परिचय कराया।
आसाराम पारीक ने बताया कि सम्मेलन के दौरान बोर्ड परीक्षा, संस्कृति ज्ञान परीक्षा, सेवानिधि संग्रह और वर्षभर शत-प्रतिशत उपस्थिति जैसे मानकों पर उत्कृष्ट कार्य करने वाले खाजूवाला एवं गंगाशहर संकुल के आचार्यों को चांदी का सिक्का भेंट कर सम्मानित किया गया।
उद्घाटन सत्र में जोधपुर प्रांत के प्रांत मंत्री रविकुमार ने ‘वन्दे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने पर उसके ऐतिहासिक महत्व और स्वतंत्रता संग्राम में उसकी भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ‘वन्दे मातरम्’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना, राष्ट्रीय स्वाभिमान और मातृभूमि के प्रति समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने आचार्यों से नई पीढ़ी में राष्ट्रभक्ति और भारतीय संस्कारों का भाव जागृत करने का आह्वान किया।
इस अवसर पर प्रबंध समिति के अध्यक्ष विनोद कुमार वर्मा, व्यवस्थापक ललित कुमार बाहेती, कंचन व्यास, पूनमचंद मारू, सीताराम शर्मा, भैराराम डूडी सहित प्रबंध समिति के पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं शिक्षाविद उपस्थित रहे।























