NEXT 27 जुलाई, 2026 श्रीडूंगरगढ़। जैन श्वेतांबर तेरापंथ धर्मसंघ की करीब ढाई सौ वर्ष पुरानी आचार्य परंपरा को आगे बढ़ाते हुए युगप्रधान आचार्य महाश्रमण ने सोमवार को मुख्यमुनि महावीरकुमार को धर्मसंघ का युवाचार्य घोषित किया। भिक्षु चेतना वर्ष के समापन अवसर पर जैन विश्व भारती परिसर की सुधर्मा सभा में आयोजित विशाल धर्मसभा में यह ऐतिहासिक घोषणा की गई। घोषणा होते ही पूरा पंडाल जयघोष से गूंज उठा और श्रद्धालुओं ने खड़े होकर नए युवाचार्य का अभिनंदन किया।

आचार्य महाश्रमण ने भगवान महावीर, तेरापंथ के संस्थापक आचार्य भिक्षु और पूर्वाचार्यों का स्मरण करते हुए कहा कि तेरापंथ धर्मसंघ में एक आचार्य के नेतृत्व की परंपरा रही है। वर्तमान आचार्य का दायित्व केवल वर्तमान का संचालन करना ही नहीं, बल्कि भविष्य के नेतृत्व की व्यवस्था भी सुनिश्चित करना है। इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए उन्होंने अपने शिष्य मुख्यमुनि महावीरकुमार को युवाचार्य पद पर नियुक्त करने की घोषणा की।
घोषणा के बाद आचार्य महाश्रमण ने परंपरा के अनुसार अपने करकमलों से नवनियुक्त युवाचार्य महावीरकुमार को अमल-धवल चद्दर ओढ़ाकर उत्तरदायित्व सौंपा। उन्होंने आशीर्वचन देते हुए कहा कि वे आचार्य भिक्षु की मर्यादाओं और तेरापंथ की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाते हुए धर्मसंघ का नेतृत्व करें।
तेरापंथ धर्मसंघ में युवाचार्य नियुक्ति की परंपरा की शुरुआत संस्थापक आचार्य भिक्षु ने अपने उत्तराधिकारी के रूप में आचार्य भारमल को चुनकर की थी। इसके बाद प्रत्येक आचार्य ने अपने भावी उत्तराधिकारी की घोषणा कर इस परंपरा को निरंतर बनाए रखा। ग्यारहवें आचार्य महाश्रमण द्वारा मुख्यमुनि महावीरकुमार को युवाचार्य घोषित किए जाने के साथ ही इस परंपरा का एक नया अध्याय जुड़ गया।





























