श्रीडूंगरगढ़ में 2022 में शुरू हुई अनूठी पहल, अब तक 7 शिविरों में महिलाओं ने बनाई पहचान, तीन दिन के स्टॉल तक सीमित रहने वाली महिलाओं को अब घर बैठे मिल रहे हैं ऑर्डर
NEXT 2 नवम्बर, 2026 श्रीडूंगरगढ़। हर घर में कोई न कोई हुनर छिपा होता है, लेकिन उस हुनर को बाजार और पहचान दिलाने का अवसर हर किसी को नहीं मिल पाता। खासकर उन महिलाओं के लिए, जो घर की जिम्मेदारियों के बीच कुछ अपना करना चाहती हैं, लेकिन संसाधनों और मंच के अभाव में आगे नहीं बढ़ पातीं। श्रीडूंगरगढ़ के सात दोस्तों ने इसी जरूरत को समझा और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की एक ऐसी पहल शुरू की, जो आज कई महिलाओं के लिए आर्थिक संबल बन रही है। इस पहल का नाम है BANI PRASS।

वर्ष 2022 में राजस्थान गौरव भीखमचन्द पुगलिया की प्रेरणा से शुरू हुई इस पहल के पीछे बजरंग सेवग, निर्मल पुगलिया, प्रेम बुच्चा, श्रीगोपाल राठी, सत्यदीप भोजक, सत्यव्रत पुगलिया और गजानंद सेवग की सामूहिक सोच है। इन सातों दोस्तों के नाम के अक्षरों को जोड़कर BANI PRASS नाम तैयार किया गया। कोई उद्यमिता से जुड़ा है, कोई शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय है तो कोई साहित्य और सामाजिक गतिविधियों से जुड़ा है। सभी की सोच एक थी कि स्थानीय महिलाओं को ऐसा मंच दिया जाए, जहां वे अपने हुनर को कारोबार में बदल सकें।
500 रुपए में तीन दिन का स्टॉल, पूरी व्यवस्था आयोजकों की
इस पहल की सबसे बड़ी खासियत है कि महिलाओं को अपने उत्पाद बेचने के लिए महंगे बाजार या बड़ी दुकान की जरूरत नहीं है। BANI PRASS में महिलाएं मात्र 500 रुपए में तीन दिनों के लिए स्टॉल लगा सकती हैं। इसमें स्टॉल से जुड़ी संपूर्ण व्यवस्थाएं उपलब्ध करवाई जाती हैं। साथ ही उन्हें एक वक्त का भोजन भी बनी प्रास द्वारा उपलब्ध करवाया जाता है जिसके कारण स्टॉल लगाने वाली महिलाएं कहती है कि हमारे पैसों से तो केवल हमारे भोजन की ही व्यवस्था होती है बाकी सारा खर्च तो बनी प्रास खुद उठाती है और हमें सम्पूर्ण सम्मानजनक व्यवस्था मुहैया करवाती है। इससे कम पूंजी में महिलाएं अपने उत्पादों को ग्राहकों तक पहुंचा पा रही हैं। वर्ष 2022 से अब तक श्रीडूंगरगढ़ में ऐसे सात शिविर आयोजित हो चुके हैं और इस बार के आयोजित त्रिदिवसीय शिविर में 36 दुकानें लगाई गई।
स्टॉल से मिला मोबाइल नंबर, अब घर बैठे पहुंच रहे ऑर्डर
इस पहल का सबसे सकारात्मक परिणाम यह सामने आया है कि महिलाओं का कारोबार केवल शिविर के तीन दिनों तक सीमित नहीं रहा। स्टॉल पर आने वाले ग्राहक महिलाओं के मोबाइल नंबर लेकर जाते हैं। इसके बाद जरूरत पड़ने पर सीधे फोन करके सामान के ऑर्डर देते हैं। महिलाएं घर पर ही उत्पाद तैयार कर ग्राहकों तक पहुंचा रही हैं। यानी जिस मंच की शुरुआत महिलाओं को तीन दिन के लिए बाजार उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से हुई थी, वह अब उनके लिए स्थायी ग्राहक और नियमित आमदनी का जरिया बनता जा रहा है।
घरेलू उत्पादों से लेकर आयुर्वेदिक सौंदर्य प्रसाधन तक
BANI PRASS के शिविरों में महिलाओं द्वारा घरों में तैयार किए गए उत्पादों को प्राथमिकता दी जाती है। यहां खाने-पीने की चीजें वाजिब दामों पर उपलब्ध होती हैं। इसके अलावा आयुर्वेदिक सौंदर्य प्रसाधन, कपड़े, माउथ फ्रेशनर, आकर्षक गिफ्ट आइटम सहित अनेक प्रकार के उत्पाद एक ही स्थान पर मिलते हैं। इन स्टॉलों की खासियत यह है कि हर उत्पाद के पीछे किसी महिला की मेहनत, रचनात्मकता और आत्मनिर्भर बनने का सपना जुड़ा होता है।
ग्राहकों के लिए भी आकर्षण, लकी कूपन और शाम को ड्रॉ
आयोजन को ग्राहकों के लिए भी आकर्षक बनाया जाता है। खरीदारी करने आने वाले विजिटर्स के लिए लकी कूपन की व्यवस्था रहती है और शाम को लकी ड्रॉ निकाला जाता है। इससे आयोजन में उत्साह का माहौल बनता है और ग्राहकों की भागीदारी भी बढ़ती है।
सात दोस्तों ने सिर्फ दुकानें नहीं लगवाईं, महिलाओं को दिया आत्मविश्वास
BANI PRASS की असली सफलता केवल शिविरों और दुकानों के आंकड़े में नहीं, बल्कि उन महिलाओं के आत्मविश्वास में छिपी है, जिन्हें पहली बार अपने बनाए सामान को ग्राहकों के सामने रखने का अवसर मिला। आज वे अपने उत्पादों की कीमत तय कर रही हैं, ग्राहकों से सीधे संवाद कर रही हैं और घर बैठे ऑर्डर पूरे कर रही हैं।
यह पहल एक सकारात्मक संदेश भी देती है कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए हमेशा बड़े निवेश या सरकारी योजनाओं की ही जरूरत नहीं होती। कभी-कभी लोगों की एक अच्छी सोच, थोड़ा सहयोग और एक सही मंच भी कई परिवारों की आर्थिक तस्वीर बदलने की शुरुआत कर सकता है। श्रीडूंगरगढ़ का BANI PRASS इसी सोच की एक खूबसूरत मिसाल बन रहा है।



























