40 वार्डों में भाजपा-कांग्रेस के टिकट पर मंथन जारी, दोनों दलों ने अब तक नहीं जारी की सूची; बगावत रोकने के लिए सीधे सिंबल देने की रणनीति, सोमवार को नामांकन केंद्रों पर उमड़ेगा सियासी हुजूम
NEXT 30 अगस्त, 2026 श्रीडूंगरगढ़। नगर पालिका चुनाव में नामांकन की प्रक्रिया अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। दो दिन बीतने के बाद भी भाजपा और कांग्रेस ने अपने अधिकृत प्रत्याशियों की सूची सार्वजनिक नहीं की है। दोनों दलों के अंदर टिकट को लेकर बैठकों का दौर जारी है। वहीं वार्डों में संभावित प्रत्याशियों के नाम सोशल मीडिया पर जरूर घूम रहे हैं, लेकिन पार्टी स्तर पर किसी नाम की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
नामांकन का सोमवार 31 अगस्त को आखिरी दिन है। ऐसे में अब टिकट के दावेदारों से लेकर उनके समर्थकों तक की निगाहें पार्टी नेतृत्व के फैसले पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि अंतिम दिन दोनों दलों के प्रत्याशियों की ओर से बड़ी संख्या में नामांकन दाखिल किए जाएंगे। इससे उपखंड व तहसील कार्यालय में भीड़ बढ़ने के साथ प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ सकता है।
आखिरी दिन टिकट, साथ में नामांकन का दबाव
राजनीतिक दलों की ओर से टिकट वितरण में हो रही देरी का असर अब नामांकन व्यवस्था पर भी दिखाई देने की संभावना है। अंतिम समय में प्रत्याशी तय होने के बाद फॉर्म भरने, दस्तावेज जुटाने और जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने के लिए सीमित समय मिलेगा। ऐसे में हलफनामे या दस्तावेजों में छोटी सी कमी भी प्रत्याशी के लिए परेशानी खड़ी कर सकती है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि दोनों प्रमुख दल अंतिम समय तक प्रत्याशियों की सूची सार्वजनिक करने से बच सकते हैं। इसके पीछे बगावत रोकने की रणनीति मानी जा रही है। पार्टी अधिकृत प्रत्याशियों को सीधे सिंबल देने अथवा रिटर्निंग अधिकारी के समक्ष अंतिम समय में फॉर्म जमा कराने की तैयारी कर सकती है। इससे टिकट कटने वाले दावेदारों को पहले से विरोध या बगावत की रणनीति बनाने का समय नहीं मिलेगा। लेकिन इस बार विकास मंच समर्थित उम्मीदवार खड़े होने से त्रिकोणीय संघर्ष देखने को मिलेगा वहीं वार्डों से निर्दलीय उम्मीदवार भी वोटों का समीकरण बिगाड़ेंगे।
भाजपा में 32 वार्डों पर लगभग सहमति, 8-10 में पेच
भाजपा सूत्रों के अनुसार करीब 32 वार्डों में प्रत्याशियों के नाम लगभग तय हो चुके हैं। वहीं 8 से 10 वार्ड ऐसे हैं जहां दो से तीन मजबूत दावेदार होने के कारण पार्टी नेतृत्व अंतिम निर्णय नहीं कर पा रहा है।
वार्ड 36 में पहले से पार्षद रहे व्यक्ति को टिकट दिए जाने की चर्चा के बीच वार्ड के कुछ लोगों और दावेदारों ने आपत्ति जताई है। इसके बीच संबंधित पार्षद ने अपने साथ पिता का भी नामांकन दाखिल करवाया है। वार्ड 32 में भी टिकट को लेकर असमंजस के बीच पूर्व पार्षद के नाम पर ही भाजपा की मुहर लगने की चर्चा है। साथ ही वार्ड 32 व 33 में इस बार जबरदस्त टक्कर देखने को मिल सकती है।
कांग्रेस में भी कई वार्डों में उलझा गणित
कांग्रेस में भी टिकट वितरण को लेकर स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है। कई वार्डों में दावेदारों के बीच सहमति नहीं बनने से फैसला अटका हुआ है। कुछ वार्डों में पार्टी नए चेहरों की तलाश में है तो कई जगह पुराने पार्षद भी टिकट की दौड़ में शामिल हैं।
सूची का इंतजार करते-करते कई ने भर दिया नामांकन
टिकट की घोषणा में देरी के बीच शनिवार को दोनों दलों की विचारधारा से जुड़े कुछ कार्यकर्ताओं ने पार्टी के नाम से नामांकन पत्र दाखिल कर दिए। साथ ही निर्दलीय भी नामांकन पत्र दाखिल किया है। अब इन उम्मीदवारों की निगाहें पार्टी के अधिकृत सिंबल पर टिकी हैं। सिंबल नहीं मिलने पर निर्दलीय की राह खुली रहेगी।
चुनावी जानकारों के अनुसार पार्टी का अधिकृत फॉर्म निर्धारित समय तक रिटर्निंग अधिकारी के समक्ष जमा नहीं होने पर संबंधित उम्मीदवार को पार्टी का अधिकृत प्रत्याशी नहीं माना जाएगा। ऐसी स्थिति में उम्मीदवार के पास निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ने का विकल्प रह सकता है, जबकि अन्य औपचारिकताएं पूरी नहीं होने पर नामांकन निरस्त भी हो सकता है।
अब सोमवार को ही साफ होगा कि 40 वार्डों की चुनावी बिसात पर किसके हाथ पार्टी का सिंबल आता है और किस दावेदार को बगावत या निर्दलीय मैदान का रास्ता चुनना पड़ता है।



















