NEXT 21 अगस्त, 2026 श्रीडूंगरगढ़। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में प्रस्तावित सुधारों को लेकर सरकार से जनहित को प्राथमिकता देने की मांग की है। UFBU ने कहा कि सार्वजनिक बैंकों का उद्देश्य केवल मुनाफा कमाना नहीं, बल्कि जनता की बचत को देश के विकास, रोजगार और सामाजिक जरूरतों के लिए उपलब्ध कराना होना चाहिए।
UFBU ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के बोर्ड में लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरने तथा कर्मचारियों-अधिकारियों, जमाकर्ताओं, किसानों, MSME और अन्य हितधारकों को प्रभावी प्रतिनिधित्व देने की मांग की है। संगठन का कहना है कि सीमित प्रतिनिधित्व वाले बोर्ड से स्वतंत्र निगरानी और जवाबदेही कमजोर होती है।
छोटे जमाकर्ताओं पर शुल्क का बोझ खत्म करने की मांग
बैंक यूनियनों ने न्यूनतम बैलेंस नहीं रखने पर जुर्माना, लेनदेन शुल्क और अन्य सेवा शुल्क की समीक्षा करने की मांग की। UFBU के अनुसार, वित्तीय समावेशन का उद्देश्य कमजोर वर्गों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ना है, ऐसे में बुनियादी बैंकिंग सेवाओं पर अनावश्यक शुल्क लगाना उचित नहीं है।
बैंक सीधे दें सस्ता ऋण, बिचौलियों पर निर्भरता घटे
UFBU ने NBFC, माइक्रोफाइनेंस संस्थाओं और फिनटेक के माध्यम से ऋण देने पर बढ़ती निर्भरता पर सवाल उठाया। संगठन ने कहा कि सार्वजनिक बैंकों को कृषि, MSME, विनिर्माण, सहकारिता, शिक्षा, आवास और रोजगार पैदा करने वाले क्षेत्रों को सीधे और किफायती ऋण उपलब्ध कराना चाहिए।
प्रेस विज्ञप्ति में दावा किया गया कि आम लोगों की जमा राशि पर अपेक्षाकृत कम ब्याज मिलता है, जबकि कई मध्यस्थ संस्थाएं ऊंची ब्याज दरों पर ऋण उपलब्ध कराती हैं। UFBU ने इसे ‘उलटी सब्सिडी’ बताते हुए आम जमाकर्ताओं की बचत के वास्तविक मूल्य की रक्षा करने की मांग की।
आउटसोर्सिंग और कॉन्ट्रैक्चुअलाइजेशन का विरोध
बैंक यूनियंस ने स्थायी प्रकृति के कार्यों में आउटसोर्सिंग और संविदा व्यवस्था बढ़ाने का भी विरोध किया। UFBU ने स्वीकृत रिक्तियों के विरुद्ध नियमित भर्ती करने, पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध कराने और कर्मचारियों को उचित वेतन व सामाजिक सुरक्षा देने की मांग की।
बड़े कॉरपोरेट NPA पर जवाबदेही तय हो
UFBU ने बड़े कॉरपोरेट ऋणों के बट्टे खाते में डालने, One-Time Settlement और ऋण वसूली से जुड़ी जानकारी में पारदर्शिता की मांग की। संगठन ने कहा कि बैंकों का पुनर्पूंजीकरण करदाताओं के पैसे से हुआ है, इसलिए कॉरपोरेट ऋण चूक का बोझ बार-बार कर्मचारियों, जमाकर्ताओं और आम नागरिकों पर नहीं डाला जा सकता।
विशेषज्ञ समिति में सभी हितधारकों को प्रतिनिधित्व
UFBU ने मांग की कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के सुधार के लिए गठित किसी भी उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति में बैंक कर्मचारी-अधिकारी, किसान संगठन, MSME, जमाकर्ता, सहकारिता, उपभोक्ता समूह और स्वतंत्र जनहित विशेषज्ञों को शामिल किया जाए। समिति के सुझाव और अंतिम रिपोर्ट भी सार्वजनिक करने की मांग की गई।
UFBU ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक देश की रणनीतिक संपत्ति हैं। उनका संचालन केवल सरकार, वरिष्ठ प्रबंधन या चुनिंदा विशेषज्ञों के आधार पर नहीं होना चाहिए। बैंक कर्मचारियों, जमाकर्ताओं और किफायती ऋण पर निर्भर उत्पादक क्षेत्रों को निर्णय प्रक्रिया में संस्थागत आवाज मिलनी चाहिए। संगठन ने जनहितकारी, जवाबदेह, समावेशी और लोकतांत्रिक सार्वजनिक बैंकिंग व्यवस्था के लिए अभियान जारी रखने की बात कही।





















