
क्षेत्र के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य राजगुरु पंडित देवीलाल उपाध्याय के अनुसार वैदिक ज्योतिषीय गणनाओं में 11 मई 2026 से एक विशेष और प्रभावशाली ग्रहयोग बनने जा रहा है। भारतीय समयानुसार सूर्योदय के साथ प्रारंभ होने वाला यह कालसर्प योग 25 मई 2026 प्रातः 09 बजकर 07 मिनट तक प्रभावी रहेगा। ज्योतिष शास्त्र में कालसर्प योग को अत्यंत संवेदनशील एवं अशुभ प्रभाव देने वाला योग माना गया है, जिसका असर व्यक्ति, समाज, राष्ट्र और विश्व स्तर तक देखने को मिल सकता है।
देश की राजनीति और व्यवस्था पर प्रभाव
श्री ऋषिकुल संस्कृत विद्यालय के भूतपूर्व सहायक आचार्य राजगुरु पंडित रामदेव उपाध्याय ने बताया कि इस योगकाल में सरकार और विपक्ष के मध्य टकराव की स्थिति तीव्र हो सकती है। अचानक राजनीतिक निर्णय, बड़े घोटालों का खुलासा, प्रशासनिक तनाव और सत्ता पक्ष-विपक्ष में तीखी बयानबाजी देखने को मिल सकती है।
उन्होंने कहा कि इस दौरान देश में राजनीतिक अस्थिरता, जन असंतोष और अफवाहों का वातावरण भी बन सकता है। कई राज्यों में सत्ता परिवर्तन अथवा बड़े राजनीतिक घटनाक्रमों की संभावनाएं भी दिखाई दे रही हैं।
अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार पर असर
ज्योतिषीय संकेतों के अनुसार इस अवधि में शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। निवेशकों में असमंजस की स्थिति बनेगी तथा आर्थिक निर्णयों का सीधा प्रभाव आम जनता पर पड़ सकता है। महंगाई दर में वृद्धि और व्यापारिक गतिविधियों में मंदी जैसे संकेत भी प्राप्त हो रहे हैं।
प्राकृतिक आपदाओं की आशंका
राजगुरु पंडित देवीलाल उपाध्याय के अनुसार कालसर्प योग के प्रभाव से भूकंप, बाढ़, आगजनी तथा अन्य प्राकृतिक घटनाओं में वृद्धि हो सकती है। मौसम में असामान्य परिवर्तन और जनजीवन को प्रभावित करने वाली परिस्थितियां उत्पन्न होने की भी संभावना व्यक्त की गई है।
विश्व स्तर पर तनाव के संकेत
विश्व राजनीति की दृष्टि से भी यह समय संवेदनशील माना जा रहा है। दो देशों के मध्य तनाव, सीमा विवाद अथवा युद्ध जैसी परिस्थितियों के संकेत मिल रहे हैं। वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, जिससे कई देशों में आर्थिक संकट और महंगाई की स्थिति गंभीर हो सकती है।
स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में वृद्धि
आचार्य रामदेव उपाध्याय ने बताया कि इस दौरान मानसिक तनाव, भय, अनिद्रा तथा शारीरिक रोगों में वृद्धि देखने को मिल सकती है। लोगों को संयमित जीवनशैली अपनाने और मानसिक शांति बनाए रखने की सलाह दी गई है।
क्या करें निवारण?
ज्योतिषाचार्यों ने इस अवधि में आध्यात्मिक उपायों को विशेष महत्व देने का आग्रह किया है। उन्होंने अधिक से अधिक गौ सेवा, भगवान शिव की आराधना, गजेन्द्र मोक्ष पाठ, भैरव उपासना तथा विश्व शांति हेतु ईष्ट देव-देवियों की पूजा करने की सलाह दी है। सकारात्मक सोच, संयम और सत्कर्मों के माध्यम से नकारात्मक प्रभावों को कम किया जा सकता है।



















