श्रीडूंगरगढ़ एडीजे कोर्ट का फैसला, 19 गवाहों और 54 साक्ष्यों के आधार पर सुनाई सजा
NEXT 20 मई, 2026 श्रीडूंगरगढ़। अपर सेशन न्यायालय श्रीडूंगरगढ़ ने चार साल पुराने हत्या के मामले में आरोपी श्रवणराम पुत्र साँवतराम निवासी बिंझासर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने आरोपी पर 45 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया।
परिवादी पक्ष के अधिवक्ता लेखराम चौधरी और मांगीलाल नैण ने बताया कि 8 मार्च 2022 को हुई वारदात के मामले में अदालत में 19 गवाहों के बयान करवाए गए तथा 54 दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए गए। सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी मानते हुए सजा सुनाई।
फोन कर दी थी मारपीट की सूचना
मामले में मृतक के चाचा परिवादी ओमप्रकाश पुत्र भोमाराम निवासी बिंझासर ने 9 मार्च 2022 को सेरूणा पुलिस थाना में रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। रिपोर्ट में बताया गया कि 8 मार्च की रात करीब 10 बजे आरोपी श्रवणराम का फोन आया था। आरोपी ने कहा कि उसके भतीजे राजूराम पुत्र दुर्गाराम के साथ आपसी झगड़े में लाठी से मारपीट हो गई है और वह जमीन पर पड़ा है।
इसके बाद मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया कि श्रवणराम ने ही लाठी से हमला कर राजूराम की हत्या की है। पुलिस ने जांच के दौरान आरोपी को गिरफ्तार कर कोर्ट में चालान पेश किया।
बचाव पक्ष ने मांगी नरमी
सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष के अधिवक्ता ने दलील दी कि अभियुक्त ग्रामीण परिवेश से है और उस पर पारिवारिक जिम्मेदारियां हैं। ऐसे में उसे न्यूनतम दंड दिया जाए।
वहीं अपर लोक अभियोजक सोहन नाथ सिद्ध ने कहा कि आरोपी ने जानबूझकर लाठी से हमला कर हत्या की और बाद में साक्ष्य मिटाने के लिए लाठी छिपा दी। इसलिए उसे कठोर सजा दी जानी चाहिए।
कोर्ट बोली- हत्या जघन्य अपराध
एडीजे सरिता नौशाद ने फैसले में कहा कि हत्या समाज की अंत:चेतना को प्रभावित करने वाला जघन्य अपराध है। ऐसे मामलों में उचित सजा नहीं मिलने से अपराधियों का मनोबल बढ़ता है और न्याय व्यवस्था प्रभावित होती है। अदालत ने आरोपी को आजीवन कारावास और 45 हजार रुपए जुर्माने से दंडित किया।



















