NEXT 11 जुलाई, 2026 श्रीडूंगरगढ़। स्कूल एजुकेशन वेलफेयर एसोसिएशन (सेवा) राजस्थान की श्रीडूंगरगढ़ इकाई के निजी विद्यालय संचालकों की बैठक शहर अध्यक्ष मनोज गुसाईं और ग्रामीण अध्यक्ष ओमप्रकाश भाकर की संयुक्त अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में माध्यमिक शिक्षा विभाग द्वारा 2 जुलाई को जारी “राज शाला संबलन” मोबाइल ऐप के माध्यम से निजी विद्यालयों के अनिवार्य मासिक निरीक्षण संबंधी दिशा-निर्देशों का विरोध करते हुए सरकार से आदेश पर पुनर्विचार की मांग की गई।

बैठक को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष कोडाराम भादू ने कहा कि लक्ष्य आधारित निरीक्षण प्रणाली से शिक्षा व्यवस्था में सुधार के बजाय भ्रष्टाचार और “इंस्पेक्टर राज” को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि प्रत्येक माह 75 प्रतिशत निरीक्षण अनिवार्य करने और इससे कम होने पर अधिकारियों के अंक शून्य करने का प्रावधान अव्यावहारिक है। इससे निरीक्षण की गुणवत्ता प्रभावित होगी और अधिकारियों पर अनावश्यक दबाव बनेगा, जिसका खामियाजा निजी विद्यालयों को भुगतना पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों को आरटीई अधिनियम-2009 एवं राजस्थान गैर-सरकारी शैक्षणिक संस्था अधिनियम-1989 के तहत स्वायत्तता प्राप्त है। ऐसे में हर माह अनिवार्य निरीक्षण कराना इस भावना के विपरीत है। साथ ही सरकारी और निजी विद्यालयों की कार्यप्रणाली, संसाधन और जवाबदेही अलग-अलग होने के बावजूद दोनों का एक समान मूल्यांकन करना उचित नहीं है।
बैठक में यह भी कहा गया कि निजी विद्यालय पहले से ही सीबीएसई, आरबीएसई, जिला शिक्षा अधिकारी, आरटीई एवं फीस अधिनियम-2016 के तहत विभिन्न निरीक्षणों से गुजरते हैं। ऐसे में “राज शाला संबलन” के तहत अतिरिक्त मासिक निरीक्षण से शैक्षणिक कार्य प्रभावित होंगे।
बैठक में मांग की गई कि निरीक्षण व्यवस्था को दंडात्मक के बजाय सहयोगात्मक और मार्गदर्शक बनाया जाए। साथ ही किसी भी नए प्रावधान को लागू करने से पहले सेवा संगठनों से विचार-विमर्श किया जाए तथा वर्तमान आदेश को पुनर्विचार होने तक स्थगित रखा जाए।
20 जुलाई को जयपुर में प्रदर्शन का निर्णय
बैठक में चेतावनी दी गई कि यदि सरकार ने समय रहते आदेश पर पुनर्विचार नहीं किया तो राज्यभर के निजी विद्यालय संचालक आंदोलन करेंगे। इसके तहत 20 जुलाई को जयपुर स्थित शिक्षा निदेशालय पर प्रदर्शन किया जाएगा।
बैठक को सुब्रत कुंडू, विजयराज सेवग, कुंभाराम घटाला, राकेश व्यास, मनीष शर्मा, रामसिंह भादू, रामकिशन धतरवाल, नरेंद्र सिद्ध, मालाराम खिलेरी, लक्ष्मण जाखड़, मोहनसिंह, राजूराम देलू, सुरेंद्र, सुरेश कीचड़, प्रकाश राजपुरोहित, धूड़ाराम गोदारा सहित अन्य पदाधिकारियों ने भी संबोधित किया।




















