मरूभूमि शोध संस्थान ने मांगी प्रविष्टियां, 30 नवंबर तक भेज सकेंगे रचनाएं; मातृभाषा दिवस पर होगा सम्मान
NEXT 3 अक्टूबर, 2026 श्रीडूंगरगढ़। राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति के विकास और संवर्द्धन के लिए मरूभूमि शोध संस्थान की ओर से प्रतिवर्ष दिए जाने वाले साहित्यिक पुरस्कार एवं सम्मान के लिए प्रविष्टियां आमंत्रित की गई हैं। इस बार प्रकाशित कृतियों के साथ अप्रकाशित पांडुलिपियों को भी सम्मान और प्रकाशन का अवसर दिया जाएगा। प्रविष्टियां 30 नवंबर 2026 तक भेजी जा सकेंगी।
संस्थान के सचिव श्याम महर्षि ने बताया कि राजस्थानी भाषा के प्रचार-प्रसार, साहित्यिक एवं पाठकीय जुड़ाव तथा महिला और बाल साहित्य को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से महाराणा प्रताप राजस्थानी साहित्य सृजन पुरस्कार, पं. मुखराम सिखवाल स्मृति राजस्थानी सृजन पुरस्कार, श्री सूर्य प्रकाश बिस्सा स्मृति राजस्थानी महिला लेखन सम्मान और कला-डूंगर कल्याणी स्मृति राजस्थानी बाल साहित्य सम्मान के लिए प्रविष्टियां मांगी गई हैं।
सम्मान समिति के संयोजक रवि पुरोहित ने बताया कि स्व. भंवरलाल-सम्पत देवी हीरावत, रतननगर के सौजन्य से प्रवर्तित 21 हजार रुपए का महाराणा प्रताप राजस्थानी साहित्य सृजन पुरस्कार राजस्थानी साहित्य की समग्र सेवा के आधार पर दिया जाएगा। वहीं 11 हजार रुपए का पं. मुखराम सिखवाल स्मृति राजस्थानी सृजन पुरस्कार पिछले सात वर्षों में प्रकाशित उल्लेखनीय कृति के लिए प्रदान किया जाएगा।
संस्थान के निदेशक प्रो. बी. एल. भादानी ने बताया कि महिला लेखन एवं बाल साहित्य सम्मान के लिए केवल मौलिक और अप्रकाशित पांडुलिपियां स्वीकार की जाएंगी। महिला लेखन के लिए 96 से 128 पृष्ठ तथा बाल साहित्य के लिए 64 से 72 पृष्ठ की किसी भी साहित्यिक विधा की पांडुलिपि भेजी जा सकती है।
चयनित पांडुलिपि का होगा नि:शुल्क प्रकाशन
चयनित पांडुलिपि का संस्थान की ओर से नि:शुल्क प्रकाशन करवाया जाएगा। इसका लोकार्पण 21 फरवरी 2027 को अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर आयोजित समारोह में किया जाएगा। रचनाकार को प्रकाशित कृति की 41 प्रतियां भी प्रदान की जाएंगी।
पांडुलिपि की एक टंकित प्रति और ई-मेल के माध्यम से साफ्ट प्रति 30 नवंबर तक सचिव, मरूभूमि शोध संस्थान, संस्कृति भवन, एनएच-11, जयपुर रोड, श्रीडूंगरगढ़ के पते पर पहुंचानी होगी। प्राप्त प्रविष्टियां वापस नहीं की जाएंगी।



















