NEXT 12 जून, 2026 श्रीडूंगरगढ़। अभिभाषक संघ श्रीडूंगरगढ़ ने शुक्रवार को राजस्थान के विधि मंत्री जोगाराम पटेल को ज्ञापन सौंपकर श्रीडूंगरगढ़ में अपर जिला एवं सत्र न्यायालय (एडीजे कोर्ट) भवन, पीठासीन अधिकारी के आवास निर्माण के लिए बजट स्वीकृत करने तथा मुंसिफ न्यायालय के सृजन की मांग की।

संघ के अध्यक्ष ललित कुमार मारू के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में बताया गया कि वर्ष 2009 में श्रीडूंगरगढ़ में एडीजे कोर्ट की स्थापना हुई थी, लेकिन करीब 15 वर्ष बीत जाने के बाद भी न्यायालय का स्थायी भवन और पीठासीन अधिकारी के आवास का निर्माण नहीं हो सका है। वर्तमान में न्यायालय बार एसोसिएशन भवन में संचालित हो रहा है, जहां पर्याप्त स्थान नहीं होने से न्यायिक कार्यों में परेशानी होती है।
ज्ञापन में बताया गया कि न्यायालय परिसर के लिए 68,100 वर्गफीट भूमि आवंटित है और भवन निर्माण के लिए मानचित्र भी तैयार किया जा चुका है। राजस्थान हाईकोर्ट की निर्माण समिति की स्वीकृति के बाद राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा जा चुका है। इसके बावजूद बजट स्वीकृति लंबित है।
बार एसोसिएशन ने श्रीडूंगरगढ़ उपखंड मुख्यालय पर मुंसिफ न्यायालय स्थापित करने की मांग भी उठाई। ज्ञापन के अनुसार वर्तमान में वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश एवं अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय में करीब 5 हजार मामले लंबित हैं। इनमें लगभग 4 हजार फौजदारी और 1 हजार से अधिक सिविल प्रकरण शामिल हैं। मामलों की बढ़ती संख्या के कारण आमजन को त्वरित न्याय नहीं मिल पा रहा है।
अधिवक्ताओं का कहना है कि मुंसिफ न्यायालय की स्थापना होने से लंबित मामलों के निस्तारण में तेजी आएगी और वर्तमान न्यायालयों पर कार्यभार भी कम होगा। न्यायालय परिसर में इसके लिए पर्याप्त भूमि और आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं।
ज्ञापन सौंपने के दौरान बार एसोसिएशन अध्यक्ष ललित कुमार मारू, पूर्व अध्यक्ष बाबूलाल दर्जी, अधिवक्ता साजिद खान और सत्यनारायण प्रजापत मौजूद रहे।





















