NEXT 30 अक्टूबर, 2026 श्रीडूंगरगढ़। कृषि भूमि को कूटरचित दस्तावेजों के जरिए हड़पने और अवैध कब्जा करने के मामले में अपर सत्र न्यायालय श्रीडूंगरगढ़ ने दो भाइयों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। न्यायाधीश कृष्णकांत ने आदेश में श्रीडूंगरगढ़ के कालूबास निवासी सुशील कुमार और रामचंद्र को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया।
मामला में परिवादी ने आरोप लगाया था कि उसकी खातेदारी की कृषि भूमि को हड़पने की नीयत से कूटरचित दस्तावेज तैयार किए गए। रिपोर्ट के अनुसार, करीब तीन साल पहले प्लॉट बेचने की लिखा-पढ़ी के दौरान सुशील कुमार ने धोखे से पॉवर ऑफ अटॉर्नी लिखवा लिया और बाद में उसी के आधार पर कृषि भूमि बेच दी। परिवादी ने आरोप लगाया कि खेत पर अवैध कब्जा भी किया गया।
मामले में सुशील पुत्र मोहनराम (40) और रामचंद्र पुत्र मोहनराम (36), निवासी कालूबास, श्रीडूंगरगढ़ ने गिरफ्तारी की आशंका जताते हुए अग्रिम जमानत याचिका पेश की थी। आरोपियों की ओर से अधिवक्ता ने पक्ष रखते हुए इसे पुरानी रंजिश के चलते दर्ज कराया गया झूठा मामला बताया। वहीं, अपर लोक अभियोजक सोहननाथ सिद्ध ने जमानत का विरोध किया।
न्यायालय ने अनुसंधान पत्रावली और तथ्यात्मक रिपोर्ट का अवलोकन करते हुए माना कि मामले में कूटरचित दस्तावेजों के जरिए कृषि भूमि बेचने और कब्जा करने के गंभीर आरोप हैं। न्यायालय ने कहा कि अनुसंधान में संकलित साक्ष्यों एवं तथ्यात्मक रिपोर्ट के आधार पर आरोपियों की मामले में संलिप्तता सामने आती है। ऐसे में उन्हें अग्रिम जमानत का लाभ देना न्यायोचित नहीं है। न्यायालय ने दोनों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।





















