NEXT 5 जून, 2026 श्रीडूंगरगढ़। श्रीडूंगरगढ़ के ऐतिहासिक एवं प्राचीन श्री पार्श्वनाथ जैन मंदिर के नवनिर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता मिली है। अहमदाबाद में आयोजित बैठक में शासनरत्न मनोज हरण, विभिन्न दानदाताओं और संबंधित पेढ़ियों के प्रतिनिधियों के साथ सकारात्मक चर्चा के बाद मंदिर के पुनर्निर्माण को लेकर सहमति बनी है। इसके साथ ही मंदिर के भव्य नवनिर्माण का मार्ग प्रशस्त हो गया है और जल्द ही निर्माण कार्य प्रारंभ किए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

जानकारी के अनुसार श्री ओसवाल पंचायत श्रीडूंगरगढ़ की कार्यकारिणी के समर्थन से अध्यक्ष विनोद भादाणी एवं मंत्री कान्ति कुमार पुगलिया ने एक प्रतिनिधिमंडल को अहमदाबाद भेजा था। प्रतिनिधिमंडल में जीर्णोद्धार संयोजक अशोक बैद और ज्योतिषविद और वास्तुविद सुमेरमल सिंघी शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल ने 5 जून को विभिन्न पक्षों के साथ बैठक कर मंदिर की वर्तमान स्थिति, भविष्य की आवश्यकताओं और प्रस्तावित निर्माण योजना पर विस्तार से चर्चा की।
बैठक के बाद मंदिर निर्माण को लेकर सकारात्मक माहौल बना और आवश्यक सहमति प्राप्त हुई। समाजजन इसे लंबे समय से संजोए गए संकल्प की दिशा में बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं। समाचार के बाद जैन समाज में खुशी का माहौल है तथा श्रद्धालुओं में मंदिर के भव्य स्वरूप को लेकर उत्साह देखा जा रहा है।
अध्यक्ष विनोद भादाणी ने बताया कि श्रीडूंगरगढ़ में मुख्य रूप से तेरापंथी परिवार निवास करते हैं। ऐसे में मूर्तिपूजक जैन समाज द्वारा करोड़ों रुपए की लागत से मंदिर निर्माण करवाने का निर्णय जैन एकता और सामाजिक समन्वय का प्रतीक माना जा रहा है।
125 साल पहले हुई थी प्रतिमा की स्थापना
बताया जाता है कि मंदिर में विराजित भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा लगभग सवा सौ वर्ष पहले स्थापित की गई थी। प्रतिमा का इतिहास आज भी शोध का विषय बना हुआ है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यह प्रतिमा सैकड़ों वर्ष पुरानी मानी जाती है तथा श्रद्धालु इसे तीर्थ स्वरूप मानकर पूजा-अर्चना करते हैं।




















